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High Court : न्यायिक अधिकारी पर आरोप विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर होने चाहिए, कोर्ट ने खारिज की अर्जी

Fri, 08 May 2026 04:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी मुकदमे को एक से दूसरी अदालत में स्थानांतरित करना गंभीर विषय है। खासकर तब जब संबंधित न्यायिक अधिकारी पर पक्षपात के आरोप लगाए जाएं।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी मुकदमे को एक से दूसरी अदालत में स्थानांतरित करना गंभीर विषय है। खासकर तब जब संबंधित न्यायिक अधिकारी पर पक्षपात के आरोप लगाए जाएं। आरोप ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों पर आधारित होने चाहिए।

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यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ ने आगरा की मेसर्स विरोला इंटरनेशनल की ओर से दायर ट्रांसफर अर्जी खारिज कर दी। मामला एक वाणिज्यिक विवाद से जुड़ा था। जिसमें कंपनी ने ट्रायल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए केस स्थानांतरित करने की मांग की थी।

कोर्ट ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के तहत ट्रांसफर की शक्ति का उपयोग बहुत सोच-समझकर और केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए। बिना ठोस आधार के ऐसे आरोप न्यायिक अधिकारियों की छवि और न्यायपालिका की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हाईकोर्ट ने संबंधित अपीलीय अदालत को निर्देश दिया कि वह मामले की शीघ्र सुनवाई कर समयबद्ध तरीके से निस्तारण सुनिश्चित करे।

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