रोजगार के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ चुके प्रतियोगी छात्रों ने विपक्ष को भी घेरा है। प्रतियोगी छात्रों ने विपक्ष से सवाल किया है कि उनकी सरकार बनी तो रोजगार के सवाल को कैसे हल करेंगे? प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पड़े पांच लाख से अधिक पदों पर भर्ती की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे युवा मंच के पदाधिकारियों ने सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान छेड़ रखा है।
रेलवे भर्ती को लेकर हुए आंदोलन की अगुवाई करने वाले युवा मंच के संयोजक राजेश सचान को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इससे नाराज प्रतियोगी छात्रों ने मंगलवार से सोशल मीडिया पर अभियान और तेज करने का निर्णय लिया है। साथ ही यह तय किया है कि रोजगार के मुद्दे पर सरकार के साथ विपक्ष से भी सवाल करेंगे।
युवा मंच के अध्यक्ष अनिल सिंह का आरोप है कि पांच साल तक फर्जी आंकड़ों का प्रोपेगेंडा और हवाहवाई घोषणाएं कर महज सुर्खियां बटोरने का काम प्रदेश सरकार ने किया। प्रदेश में में 1.37 लाख बर्खास्त किए गए शिक्षक समेत सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के सापेक्ष भी नई भर्ती नहीं किए जाने से कर्मचारियों की संख्या में कमी आई है।
लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योगों में 2.61 करोड़, मनरेगा में 1.50 करोड़, स्किल मैपिंग में 40 लाख रोजगार सृजन के दावे जमीनी हकीकत से अलग है। सच्चाई यह है कि प्रदेश में रोजगार संकट चरम पर है। यही वजह है कि बीएड, बीटीसी, डीएलएड, एमटेक, बीटेक, एमसीए, पीएचडी डिग्री हासिल करने वाले ज्यादातर युवा 5-6 हजार रुपये मानदेय की नौकरियों के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
अनिल सिंह का कहना है कि रोजगार के सवाल को चुनावी मुद्दा बनाने में पूरी ताकत झोंक दी जाएगी। चार महीने से अनवरत जारी रोजगार आंदोलन चलाने के बाद भी रोजगार के सवाल पर अमल नहीं किया गया। अब युवाओं ने विपक्ष, खासतौर पर अखिलेश यादव से भी पूछा कि उनकी सरकार बनने पर रोजगार के सवाल को कैसे हल करेंगे?
उनकी रोजगार नीति क्या है? प्रदेश में पांच लाख रिक्त पदों को कितने दिनों में विज्ञापित कर भरने की कवायद शुरू होगी? कितने नए पदों का सृजन कर सरकारी नौकरी देने की योजना है? युवाओं के मन में इन सवालों को लेकर ऊहापोह की स्थिति है।