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इलाहाबाद विश्वविद्यालय : कैंपस की छवि बिगाड़ने वालों को नहीं मिलेगी ग्रेच्युटी,कार्यपरिषद की बैठक में फैसला

Fri, 04 Oct 2024 05:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की छवि बिगाड़ने में अगर विश्वविद्यालय के किसी शिक्षक या कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उन्हें सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी का लाभ नहीं दिया जाएगा। यह निर्णय बृहस्पतिवार को इविवि के सीनेट परिसर स्थित नॉर्थ हॉल में कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव की अध्यक्षा में हुई कार्य परिषद की बैठक में लिया गया।

सिर्फ यही नहीं, कार्य परिषद ने यह भी मंजूरी दी कि यदि कोई कर्मचारी भ्रष्टाचार, यौन उत्पीड़न, ड्यूटी पर उपस्थित न होने या विश्वविद्यालय की छवि के लिए हानिकारक किसी अन्य कार्य में लिप्त पाया जाता है तो विश्वविद्यालय के नियम संहिता के अनुसार उस कर्मचारी को सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी का लाभ नहीं दिया जाएगा।

साथ ही विश्वविद्यालय के कर्मचारी कुलपति की ओर से अनुमोदन के बाद ही सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय के बारे में लिख सकेंगे। निर्णय लिया गया कि इस संबंध में देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक बयान देने के मामले में मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम हरिजन को चेतावनी जारी की जाएगी।

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इसके साथ ही सोशल मीडिया गाइडलाइन संबंधी रजिस्ट्रार की ओर से दिसंबर 2020 को सभी संकाय और कर्मचारियों के लिए जारी आदेश को पुनः जारी करने को मंजूरी दी गई। कुलसचिव की ओर से शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को आदेश जारी किया जाएगा कि बिना कुलपति की अनुमति के कोई भी इनपुट प्रेस को न भेजा जाए। सभी प्रकार की जानकारी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी कार्यालय के माध्यम से ही प्रेषित की जाएंगी।

123 गैर शैक्षणिक कर्मियों की नियुक्ति को मिली स्वीकृति

विश्वविद्यालय की जनसंपर्क अधिकारी प्रो. जया कपूर ने बताया कि हाल ही में संपन्न हुई विभिन्न श्रेणियों में 123 गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में नियुक्त के परिणाम को कार्य परिषद ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसमें एक अनुभाग अधिकारी, तीन आशुलिपिक, आठ प्रयोगशाला सहायक, 19 पुस्तकालय सहायक, 31 प्रयोगशाला अटेंडेंट, 12 पुस्तकालय अटेंडेंट, 49 जूनियर ऑफिस असिस्टेंट की भर्ती को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

64 शिक्षकों की नियुक्ति को किया गया नियमित

कार्य परिषद ने 64 शिक्षकों की नियुक्त को नियमित किया है। संस्कृत विभाग में दो प्रोफेसरों, अंग्रेजी, मनोविज्ञान, प्राणीशास्त्र, संस्कृत और सीबीसीएस विभागों में 10 एसोसिएट प्रोफेसरों और अंग्रेजी, मनोविज्ञान, संस्कृत, थिएटर एवं फिल्म और एनसीईएमपी विभागों में 52 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्त को नियमित करने को भी मंजूरी दी गई।

तीन प्रोफेसरों के खिलाफ झूठी शिकायत की जांच करेंगे प्रो. भारती दास

एक फैसले में कार्य परिषद ने अर्थशास्त्र विभाग के तीन वरिष्ठ प्रोफेसरों के खिलाफ झूठी शिकायत के संबंध में उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखने वाले सर्वाेच्च न्यायालय के फैसले के मामले में एक महिला शिक्षक को दिए गए कारण बताओ नोटिस और उनकी इस नोटिस के उत्तर की जांच के संबंध में प्रो. भारती दास को जांच अधिकारी के रूप में नियुक्त करने को मंजूरी दी। इस मामले में कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने के कारण यह निर्णय लिया गया। एक अन्य मामले में उसी महिला शिक्षक द्वारा 90 दिनों से अधिक समय तक ड्यूटी से अकारण अनुपस्थिति के मामले में परिषद ने प्रस्ताव पारित किया कि नियमों के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई के साथ आगे बढ़ने से पहले रजिस्ट्रार की ओर से महिला शिक्षक को दूसरा कारण बताओ जारी किया जाए।

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हर पाठ्यक्रम में एनआरआई के लिए पांच सीटें

इविवि में आवेदनों की अधिक संख्या और प्रवेश की मांग को देखते हुए कार्य परिषद ने सहमति प्रदान की कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक पाठ्यक्रम में एनआरआई कोटे के तहत पांच सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। इन सीटों पर प्रवेश वर्तमान सत्र 2024-25 में सुपरन्यूमरिक कोटे के तहत होगा। अगले सत्र से कुल स्वीकृत सीटों में विलय कर दिया जाएगा। हालांकि, यह सीट वृद्धि शोध पाठ्यक्रमों पर लागू नहीं होगी। अगर पाठ्यक्रम के लिए पांच से अधिक आवेदन हैं, तो चयन प्रवेश समिति की ओर से निर्धारित नियमों के तहत योग्यता के आधार पर किया जाएगा।
 

वरिष्ठता सूची से जुड़े मामलों के लिए कमेटी गठित

कार्य परिषद ने शिक्षकों की वरिष्ठता सूची से जुड़े मामलों को देखने के लिए कुलपति की अध्यक्षता में विज्ञान संकाय के डीन प्रो. बेचन शर्मा और डीन-रिसर्च एंड डेवलपमेंट एवं निदेशक आईआईडीए प्रो.एस.आई. रिजवी के साथ एक तीन सदस्यीय समिति गठित करने को मंजूरी दी है।

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