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...तो इविवि छात्रसंघ पूरा नहीं कर सकेगा शतक

Sun, 19 May 2019 12:25 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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allahabad university
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अगर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र संघ की जगह छात्र परिषद का गठन होता है तो छात्र संघ अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूरे नहीं कर सकेगा। छात्रसंघ पहली बार 1923 में अस्तित्व में आया था और अब तक यह अपने सफर के 97 साल पूरे कर चुका है। 
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पहली बार ब्रिटिश सरकार ने छात्रसंघ को वर्ष 1942 में भंग किया था। 1942 के आंदोलन के दौरान कचहरी में गोली चली थी और इसमें छात्र नेता लाल पद्मधर शहीद हो गए थे। वर्ष 1946 तक छात्रसंघ भंग रहा लेकिन इसके बाद एनडी तिवारी की अगुवाई में हुए आंदोलन के बाद वर्ष 1946 में छात्रसंघ को बहाल किया गया। इसके बाद वर्ष 1953 में तत्कालीन राज्यपाल कन्हैयालाल मानिकलाल मुंशी ने छात्रसंघ को एक ऐसी बॉडी बनाने का प्रयास किया जो सीधे कुलपति के दिशा-निर्देशों पर काम करती लेकिन इसको लेकर जबर्दस्त विरोध हुआ और तत्कालीन सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। 
इसके बाद वर्ष 2002 में छात्रसंघ पर रोक लगा दी गई थी और वर्ष 2003 में प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार बनने पर मुलायम सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय आए थे और छात्रसंघ भवन पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने प्रदेश भर में छात्रसंघ की बहाली की घोषणा की थी। छात्रसंघ को लेकर अंतिम विवाद वर्ष 2005 में हुआ था, जब छात्रसंघ चुनाव के दौरान उपाध्यक्ष प्रत्याशी कमलेश यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद वर्ष 2006 से 2011 तक छात्रसंघ का चुनाव नहीं हुआ।
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पहले भी हो चुका है छात्र परिषद के गठन का निर्णय
इविवि में वर्ष 2005 में छात्र नेता की हत्या के छह साल बाद विश्वविद्यालय की पांच दिसंबर 2011 को हुई एकेडमिक कौंसिल की बैठक में छात्र परिषद के गठन का निर्णय लिया गया था। हालांकि इस फैसले के बाद इविवि में जमकर बवाल हुआ था। तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए राहुल गांधी ने इविवि के तत्कालीन वीसी एके सिंह को दिल्ली बुला लिया था और राहुल गांधी के सीधे हस्तक्षेप के बाद 22 दिसंबर 2011 को छात्रसंघ बहाली की घोषणा की गई थी।

ऐसे होता है छात्र परिषद का गठन
इसमें छात्रसंघ की तरह आम छात्र सीधे पदाधिकारी नहीं चुनते हैं। सबसे पहले प्रत्येक कक्षा के हर सेक्शन से एक कक्षा प्रतिनिधि चुना जाता है। किसी सेक्शन में 100 से अधिक छात्र हैं तो उसे सेक्शन से दो कक्षा प्रतिनिधि चुने जाते हैं। चुने हुए कक्षा प्रतिनिधि छात्र परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री एवं अन्य पदाधिकारियों को चुनते हैं। 

बोले पूर्व अध्यक्ष
‘इविवि का छात्रसंघ राजनीति की नर्सरी और लोकतंत्र की प्राथमिक पाठशाला है। अगर इविवि छात्र परिषद लाने का निर्णय लेता है तो यह लोकतंत्र की हत्या होगी। जिस अशांत वातावरण की बात की जा रही है, उसके लिए छात्रसंघ नहीं, बल्कि कुछ बाहरी अराजकतत्व जिम्मेदार हैं। इविवि प्रशासन को ऐसे अराजकतत्वों पर रोक लगानी चाहिए। छात्रसंघ को खत्म किया गया तो आंदोलन होगा और सभी पूर्व पदाधिकारी भी इसमें शामिल होंगे।’ श्याम कृष्ण पांडेय, इविवि छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष

‘इविवि प्रशासन को अशांत महौल के लिए छात्रसंघ को जिम्मेदार ठहराने की जगह परिसर को ठीक करना चाहिए। अगर छात्र परिषद के गठन का निर्णय हुआ तो इससे चुनाव में भ्रष्टाचार और बाहरी लोगों को हस्तक्षेप बढ़ेगा। यह न सिर्फ छात्रों, बल्कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के लिए भी घातक साबित होगा। इविवि प्रशासन को परिसर में अनुशासन बनाने के लिए पुलिस और शिक्षकों का सहयोग लेने की जरूरत है।’ अनुग्रह नारायण सिंह, इविवि छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष
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