कुछ दिनों पहले भाजपा के युवा नेता एवं इविवि के पूर्व छात्र अविनाश दुबे ने सांसद से मिलकर हॉस्टल की बदहाली से उन्हें अवगत कराया था, जिसके बाद सांसद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा। उन्होंने पत्र में लिखा है कि विलियम हॉलैंड इलाहाबाद यूनिवर्सिटी सोसाइटी वर्ष 1974 से 1995 तक चलती रही।
हॉलैंड हॉल हॉस्टल का नाम बदलकर ‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय मेमोरियल छात्रावास’ कर दिया जाए। कौशाम्बी के सांसद विनोद सोनकर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर यह प्रस्ताव भेजा है। साथ ही पत्र के माध्यम यह मांग भी की है कि हॉस्टल परिसर को भारत सरकार अधिग्रहीत करे, ताकि वहां की स्थिति में सुधार आ सके।
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कुछ दिनों पहले भाजपा के युवा नेता एवं इविवि के पूर्व छात्र अविनाश दुबे ने सांसद से मिलकर हॉस्टल की बदहाली से उन्हें अवगत कराया था, जिसके बाद सांसद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा। उन्होंने पत्र में लिखा है कि विलियम हॉलैंड इलाहाबाद यूनिवर्सिटी सोसाइटी वर्ष 1974 से 1995 तक चलती रही।
1995 में यह सोसाइटी अस्तित्वविहीन हो गई। सांसद का दावा है कि अब हॉलैंड हॉल हॉस्टल न तो किसी सोसाइटी और न ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अधीन है। ऐसे स्थित में उसके देखरेख एवं रखरखाव की जिम्मेदारी किसी के पास नहीं है। नतीजा कि हॉस्टल में रहने वाले विश्वविद्यालय के छात्रों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़ रहा है।
सांसद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष चार प्रस्ताव रखे हैं। पहला यह कि छात्रावास का नाम बदलकर ‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय मेमोरियल छात्रावास’ कर दिया जाए। हॉस्टल एवं उससे जुड़ी जमीन केंद्र सरकार अधिग्रहीत कर ले और विश्वविद्यालय को सौंप दे। हॉलैंड हॉल हॉस्टल पर जितने बकाये और ऋण हैं, उन्हें माफ कर दिया जाए।
साथ ही हॉस्टल का सुदृढ़ीकरण एवं सुंदरीकरण पुन: कराया जाए। वहीं, इविवि के पूर्व छात्र अविनाश दुबे ने आरोप लगाया है कि हॉस्टल की अनदेखी के कारण वहां अनधिकृत रूप से सट्टेबाजों और कारोबारियों ने कब्जा कर लिया है। हॉस्टल के कई भवनों अवैध कब्जे हैं। वहां पौधशाला एवं दुकानों का आवंटन कर दिया है।