शिक्षक-छात्र अनुपात बिगड़ा इसीलिए रैकिंग में इविवि पिछड़ा
एनआईआरएफ रैंकिंग में इविवि में शिक्षक-छात्र अनुपात ने समीकरण बिगाड़ दिया। इविवि की ओर से एनआईआरएफ रैंकिंग-2022 के लिए सितंबर 2021 में डाटा भेजा गया था, तब इविवि में 29 हजार छात्र और 293 शिक्षक थे। वहीं, 2016 में छात्रों की संख्या 29 हजार से कम थी और शिक्षक की संख्या पांच सौ के आसपास थी। धीमे-धीमे छात्र-शिक्षक अनुपात बिगड़ता गया, जबकि किसी भी संस्थान की एनआईआरएफ रैंकिंग में यह सबसे महत्वपूर्ण मानक होता।
एनआईआरएफ रैंकिंग पर्सेप्शन के आधार पर भी तय होती है। इसके लिए अलग से अंक दिए जाते हैं। एनआईआरएफ की ओर से शिक्षकों, पुराछात्रों एवं अन्य गणमान्य लोगों को ईमेल भेजकर शिक्षण संस्थान के प्रति उनके नजरिये के बारे में पूछा जाता है। अच्छा पर्सेप्शन न होने के कारण भी विश्वविद्यालय लगातार चार वर्षों से देश के टॉप 200 शिक्षण संस्थानों की लिस्ट से बाहर है। इसके अलावा ग्रेजुएशन आउटकम के आधार पर भी रैंकिंग निर्धारित की जाती है।
इसके तहत संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों के प्लेसमेंट के आधार पर अंक निर्धारित किए जाते हैं। वहीं, रैंक निर्धारण में यह भी देखा जाता है कि साल में कितने रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए, स्कोपस जर्नल्स में कितने रिसर्च पेपर प्रकाशित किए गए, बजट का कितना उपयोग किया गया, गवर्नमेंट अफसरों के लिए कितने कोर्स संचालित किए गए। इसके साथ कई अन्य मानकों के आधार पर भी रैंक तय की जाती है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- फोटो : prayagraj
‘उन कमियों को दूर करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है तो बेहतर रैंकिंग की राह में बाधा बन रहीं हैं। मुख्य रूप से इविवि में शिक्षक-छात्र अनुपात बिगड़ने से नुकसान हुआ है। इसे बेहतर बनाने के लिए शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। 100 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है। चयन के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है। परिसर में शैक्षणिक और अनुसंधान सुविधाओं में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। इन तमाम प्रयासों के आधार पर हम छात्र, शिक्षकों और कर्मचारियों के सहयोग से 2023 में अच्छी रैंकिंग प्राप्त कर सकेंगे।’ - प्रो. संगीता श्रीवास्तव, कुलपति, इविवि
प्रदर्शन का आंकलन कर बेहतर का होगा प्रयास
मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आरएस वर्मा का कहना है कि हम एनआईआरएफ रैंकिंग का विश्वलेष्ण करेंगे। संस्थान ने एनआईआरएफ के कुछ मानकों में सुधार किया है। हम कहां पीछे रह गए, इसका विश्लेषण करेंगे और आने वाले दिनों बेहतर का प्रयास करेंगे। इसको लेकर संस्थान पहले से ही योजना बनाकर काम कर रहा है। वहीं ट्रिपलआईटी के एसोसिएट डीन (इंस्टीट्यूट रैंकिंगए लाइब्रेरी और ई लाइब्रेरी) डॉ सतीश कुमार सिंह का कहना है कि संस्थान को 93 रैंक मिली है। छोटा संस्थान होने के बावजूद तकनीकी संस्थानों में शीर्ष सौ में जगह बनाने में हम कामयाब रहे हैं। इसका श्रेय छात्रों और संकाय सदस्यों को जाता है। संस्थान की रैंकिंग में और सुधार आए, इसके लिए हम सब मिलकर विचार-विमर्श कर बेहतर योजना तैयार करेंगे। ताकि आने वाले सालों में रैंकिंग में और सुधार हो सके।