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नए सत्र के लिए इविवि को चाहिए 81.45 करोड़ रुपये

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-यूजीसी को भेजा प्रस्ताव, अकादमिक गतिविधियों के लिए मांगे सर्वाधिक 22.45 करोड़
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-बिजली पर खर्च होंगे 16.45 करोड़ रुपये, आउटसोर्सिंग स्टाफ को देने हैं 14 करोड़ रुपये
प्रयागराज। कोरोना संक्रमण के बीच इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में नया सत्र कब शुरू हो सकेगा, इस पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, इविवि प्रशासन ने अब नए सत्र के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को बजट की डिमांड भेज दी है। नए सत्र के लिए इविवि प्रशासन को 81.45 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। सबसे अधिक धनराशि अकादमिक गतिविधियों पर खर्च करने के लिए मांगी गई है। पिछले सत्र के लिए इविवि प्रशासन को 50 करोड़ 78 लाख 74 हजार रुपये का बजट मिला था।
इविवि प्रशासन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में विश्वविद्यालय की नैक रैकिंग, एनआईआरएफ रैंकिंग, शिक्षकों के स्वीकृत पदों एवं रिक्त पदों के साथ तमाम सूचनाएं भी शामिल हैं और इन्हीं के आधार पर नए सत्र 2020-21 के लिए बजट की मांग की गई है। प्रस्तावित बजट में यह जानकारी भी दी गई है कि सत्र 2020-21 में अप्रैल से जून तक आठ करोड़ 56 लाख 33 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। नए सत्र के प्रस्तावित बजट में सबसे अधिक 22 करोड़ 45 लाख रुपये का खर्च अकादमिक गतिविधियों के लिए प्रस्तावित हैं और इसमें एक करोड़ 78 लाख 48 हजार रुपये अप्रैल से जून तक खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा 14 करोड़ रुपये आउटसोर्सिंग स्टाफ को भुगतान के लिए मांगे गए हैं।
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वहीं, नए सत्र में बिजली बिल के भुगतान के लिए 16 करोड़ 45 लाख रुपये की मांग की गई। हालांकि पिछले सत्र 2019-20 में इविवि प्रशासन ने बिजली बिल पर 10 करोड़ 83 लाख 37 हजार रुपये खर्च किए थे। वहीं, क्वाटर चार्ज के भुगतान के लिए दो करोड़ पांच लाख रुपये की डिमांड की गई है। पिछले सत्र में इस मद में तकरीबन 72 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इसके अतिरिक्त प्रयोगशाला पर खर्च के लिए 85 लाख रुपये, टीए/डीए पर 35 लाख और सेमिनार/कांफ्रेंस आदि के लिए 70 लाख रुपये की डिमांड की गई है। वहीं, प्रशासनिक कार्यों पर 16 करोड़ 15 लाख रुपये का खर्च प्रस्तावित है, जिसमें अप्रैल से जून तक तीन करोड़ 89 लाख 86 हजार रुपये का व्यय हो चुका है। प्रॉपर्टी टैक्स के लिए एक करोड़ 20 लाख रुपये और अन्य प्रकार के खर्चों (यूजीसी नॉन-नेट फेलोशिप) के लिए सात करोड़ 25 लाख रुपये की डिमांड की गई है।
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