हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय से साफ तौर से कहा है कि छात्रावासों को हर हाल में खाली कराया जाए। अवैध अंत:वासियों को निकालने के बाद हास्टलों की मरम्मत कराकर उनको वैध छात्रों को सौंपा जाए। कोर्ट के निर्देश पर बृहस्पतिवार को डीएम और एसएसपी की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया है। बताया गया कि छात्रावासों को खाली कराने की कार्ययोजना तैयार है। शहर में धारा 144 लगा दी गई है। 21 से 25 मई तक अभियान चलाया जाएगा।
मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति रेखा दीक्षित की पीठ ने कहा कि कार्ययोजना पर अमल लाते हुए एक बार सभी छात्रावासों को पूरी तरह से खाली कराया जाए। छात्रों का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा ने कहा कि वैध अंत:वासियों को परेशानी न हो इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए। पीठ का कहना था कि वह वैध अंत:वासियों का पूरा ध्यान रखेंगे। छात्र कानून अपने हाथ में न लें। वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि छात्रावासों में कई प्रकार की समस्याएं हैं। हॉस्टल वार्डेन और अधीक्षकों के हॉस्टल में नहीं रहने की शिकायतें आम हैं। किसी भी छात्रावास में मेस नहीं चलती है। पीठ ने कहा कि उनको इन बातों की भी जानकारी है, मगर पहले छात्रावासों की सफाई जरूरी है। कोर्ट इस मामले पर 25 अप्रैल को सुनवाई करेगी।