एजी ऑफिस के एकाउंट विभाग में 10 कर्मचारियों का डिमोशन कर दिया गया है। बुधवार को इसका आदेश जारी किया गया। इसके बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। कर्मचारी विभागीय परीक्षा पास करके एकाउंटेंट पद पर प्रमोट हुए थे, लेकिन अफसरों को तीन साल बाद याद आया कि वे न्यूनतम योग्यता ही नहीं रखते। कर्मचारियों के डिमोशन का आदेश जारी होने के बाद सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर उस समय इनकी डिग्री क्योें नहीं देखी गई और अफसरों ने उन्हें कैसे प्रमोट कर दिया।
मल्टी टॉस्किंग स्टॉफ (एमटीएस) तथा क्लर्कल ग्रेड के कर्मचारियों को एकाउंटेंट पद पर प्रमोट करने के लिए विभाग की ओर से अगस्त 2014 से फरवरी 2017 के बीच परीक्षा आयोजित कराई गई थी। आठ कर्मचारियों ने अगस्त 2014 में विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद इन्हें एकाउंटेंट पद पर प्रमोट कर दिया गया।
इनके अलावा दो कर्मचारियों ने इसी साल फरवरी में परीक्षा पास की और उन्हें भी प्रमोट कर दिया, लेकिन तकरीबन तीन साल बाद पता चला कि कर्मचारी स्नातक ही नहीं हैं। जबकि, एकाउंटेंट पद पर प्रमोशन के लिए स्नातक होना अनिवार्य योग्यता है। यह बात सामने आने के बाद सभी 10 कर्मचारियों को उनके पुराने पद पर डिमोट कर दिया गया है। आदेश में मिस कम्युनिकेशन की बात कही गई है, लेकिन कर्मचारी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इसमें उनकी क्या गलती है। वहीं डिमोशन का आदेश जारी करने वाले वरिष्ठ उप महालेखाकार (प्रशासन) अरविंद श्रीवास्तव ने इस बारे में कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
डिमोशन की कार्रवाई गलत है। अगर, गलती से कर्मचारियों का प्रमोशन कर भी दिया गया तो उन्हें स्नातक करने का मौका मिलना चाहिए था। इससे प्रभावित कर्मचारियों की वरिष्ठता पर भी असर पड़ेगा। इस गलती के लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सेवा नियमावली में इसका प्रावधान भी है।
हरिशंकर तिवारी, सिविल एकाउंट्स ब्रदरहुड के पूर्व अध्यक्ष