इलाहाबाद विश्वविद्यालय और उसके संबद्ध कॉलेजों में नए छात्रसंघ से छात्र-छात्राओं को कई उम्मीदें थीं। छात्रसंघ परिसर में शांति व्यवस्था, पठन-पाठन का माहौल सुधरवाने का काम करेगा ही रचनात्मक कार्यों के जरिए अपने होने का एहसास कराएगा लेकिन अभी तक न तो ऐसा कुछ हुआ और न ही ऐसा कुछ होता नजर आ रहा है। इविवि और कॉलेजों में छात्रसंघ सिर्फ राजनीतिक गतिविधियों में ही लिपटा नजर आ रहा है। छात्र-छात्राओं से उनका जैसे वास्ता नहीं नजर आ रहा है।
पिछले वर्ष छात्रसंघ ने कम से कम साप्ताहिक कार्यक्रम आयोजित किए थे। इसमें छात्र-छात्राओं ने भागीदारी भी की थी। इसी तरह कॉलेजों में भी एक-दो कार्यक्रम हो गए थे लेकिन इस छात्रसंघ ने अभी तक इस तरह की भी कोई पहल नहीं की है। छात्रसंघ को गठित हुए महीने भर से अधिक समय बीत चुका है लेकिन छात्रसंघ के पदाधिकारी अपने राजनीतिक कॅरियर सुधारने में लगे हैं। नतीजतन, विवि और कॉलेजों में छात्रों की दुश्वारियां वैसी ही हैं। उसमें कोई सुधार नहीं हुआ। छात्रसंघ की ओर से इसके लिए कोई ठोस पहल भी नहीं दिख रही है। हां, छात्रसंघ की उपाध्यक्ष नीलू जायसवाल, सांस्कृतिक सचिव अंकुश दूबे ने कुछ पहल की है लेकिन पूरब के ऑक्सफोर्ड के लिए ये बहुत ही मामूली है। छात्रसंघ अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह यादव का कहना है कि जो एजेंडे तय हुए थे, उन पर काम हो रहा है। इसके बाद रचनात्मक कार्यों को कराए जाने की कोशिश होगी।