इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लॉकर से निकले पांच सौ साल पुराने ताम्रपत्र और अभिलेख।
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अमूल्य धरोहरों की बनाई जा रही है सूची
इन सभी अमूल्य धरोहरों की सूची बनाकर प्रो.मानस मुकुल दास ने इनको गोदरेज की एक सेफ में सुरक्षित रखवा दिया। इसकी तीन चाभियां कुलपति, डीन कला संकाय व लाइब्रेरियन को इस आशय से सौंप दी। ताकि, इविवि की इन अमूल्य धरोहरों को भविष्य में सहेज कर सुरक्षित रखा जा सके।
कुलपति प्रो.संगीता श्रीवास्तव की ओर से गठित विशेषज्ञों की टीम की मौजूदगी में बृहस्पतिवार को फिर तिजोरी खोली गई, जिसमें ऐतिहासिक एवं दुर्लभ दस्तावेज मिले। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन दस्तावेजों को फिर से तिजोरी में सुरक्षित रखवा दिया गया है। जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन्हें प्राचीन इतिहास विभाग के संग्रहालय में रखा जाएगा। ताकि, विवि के विद्यार्थी इन पर अध्ययन कर सकें।
प्रो.अरुण कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि तिजोरी के दोबारा खोलने के बाद मिलीं अमूल्य धरोहरों की प्रो.दास के समय तैयार की गई सूची से भी मिलान करा लेना चाहिए। ताकि, इसे सुनिश्चित किया जा सके कि बीच में तिजोरी को खोलकर इन धरोहरों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है।