इलाहाबाद विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर रामसेवक दुबे ने छात्रसंघ अध्यक्ष उदय प्रकाश यादव, उपाध्यक्ष अखिलेश यादव और उपमंत्री सत्यम सिंह सनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए कर्नलगंज थाने में तहरीर दी है। तीनों छात्र नेताओं ने चीफ प्रॉक्टर की नियुक्ति को फर्जी बताते हुए एससी/एसटी एक्ट आयोग को पत्र लिखा था। चीफ प्रॉक्टर ने तहरीर के साथ साक्ष्य के तौर पर 1995 में जारी उस विज्ञापन की प्रति भी पुलिस के समक्ष प्रस्तुत की है, जिसके तहत उनका चयन प्रवक्त पद के लिए हुआ था।
छात्र नेताओं ने आरोप लगाया था कि चीफ प्रॉक्टर की नियुक्ति एससी के लिए आरक्षित पद पर फर्जी तरीके से हुई है। छात्र नेताओं ने एससी/एसटी आयोग को भी पत्र लिखा था। इसके जवाब में चीफ प्रॉक्टर ने तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए पुलिस को दी तहरीर में कहा है कि उदय, अखिलेश और सत्यम विश्वविद्यालय परिसर में भ्रम फैलाकर उनके खिलाफ अमर्यादित, आधारहीन, अनर्गल और असत्य प्रचार कर रहे हैं।
वहीं इविवि के सेवानिवृत्त प्रोफेसर रामिकिशोर शास्त्री के संबंध में अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में पीआरओ चित्तरंजन सिंह बुरी तरह घिर गए हैं। कानूनी नोटिस देने के बाद प्रोफेसर शास्त्री ने अब अदालत की शरण ले ली है। उन्होंने पीआरओ के खिलाफ मानहानि करने की धारा 500 में परिवाद दाखिल किया है।
प्रोफेसर शास्त्री की अर्जी पर संज्ञान लेते हुए स्पेशल सीजेएम बबिता पाठक ने मामले में बयान वादी के लिए सात अक्तूबर की तारीख नियत की है। प्रोफेसर शास्त्री के अधिवक्ता केशराचंद्र द्विवेदी ने बताया कि प्रोफेसर रामकिशोर शास्त्री ने पीएचडी मानद उपाधि डीजीपी ओपी सिंह के दिए जाने के विरोध में बयान दिया था। इस बयान पर इविवि की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए पीआरओ चित्तरंजन सिंह ने प्रोफेसर शास्त्री के संबंध में अपमानजनक और अवमाननापूर्ण टिप्पणी की थी।