इलाहाबाद विश्वविद्यालय पुरा छात्र सम्मेलन का शुभारंभ किया गया।
- फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने बताया कि उन्हें इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इतना प्यार है कि गृह जनपद न होने के बावजूद वह आज भी होम टाउन के कॉलम में इलाहाबाद लिखते हैं। पढ़ना, लिखना, संघर्ष करना, आगे बढ़ना और मोहब्बत करना यहीं से सीखा। पुरा छात्र सम्मेलन के बहाने मोहब्बत का यह सिलसिला यूं ही चलता रहे, यही उनकी कामना है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्थल ने कहा कि मेरठ से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद पहले तो दिल्ली के हंसराज कॉलेज में प्रवेश लिया लेकिन दो माह बाद ही कॉलेज छोड़कर इविवि चले आए। यहां की फैकल्टी इतनी अच्छी थी कि ध्यान से सिर्फ लेक्चर सुन लें तो परीक्षा पास करने के लिए किताब उठाने की जरूरत नहीं पड़ती थी।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने बताया कि क्लास में आने के बाद लगता था कि दूसरी दुनिया में आ गए। वास्तव में व्यक्तित्व का विकास विश्वविद्यालय में ही हुआ। यहां से विधि की पढ़ाई की और वर्ष 1973 से 1978 तक यहां के छात्र रहे। गर्व होता है कि इविवि में पढ़ने का मौका मिला। यही यादें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करतीं हैं। कार्यक्रम के दौरान मंच पर चांसलर आशीष चौहान, कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव, इविवि पुराछात्र संघ के अध्यक्ष हेरंब चतुर्वेदी एवं सचिव प्रो. कुमार वीरेंद्र मौजूद रहे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय पुरा छात्र सम्मेलन का शुभारंभ किया गया।
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आज भी याद है लल्ला चुंगी का चाय-समोसा
इविवि के पुराछात्रों को आज भी लल्ला चुंगी का चाय-समोसा याद है और वे यह भी नहीं भूले कि चाय-समोसे की दुकान के ठीक सामने महिला छात्रावास भी है। फिलहाल दुकान अब वहां नहीं है। चाय के बहाने इविवि के विज्ञान संकाय के बॉटनी विभाग को भी याद किया गया। सम्मेलन के दौरान मंच पर पुराछात्र बीच-बीच में छात्र जीवन की खट्टी-मीठी यादें कुछ इसी चुटीले अंदाज में साझा करते रहे। ऐसा लगा कि मानो विश्वविद्यालय में कदम रखते ही वे खुद छात्र बन गए।