संस्थान को बचाने के लिए बढ़ानी पड़ी फीस - कुलपति
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के अस्तित्व को बचाने के लिए फीस बढ़ानी पड़ी। फीस वृद्धि के मुद्दे पर विरोध तेज होने के बाद कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने विश्वविद्यालय का पक्ष रखा है। उनका कहना है कि 112 वर्षों से फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी। बिजली के बकाया बिलों का भुगतान करने और अन्य रखरखाव के लिए शुल्क बढ़ाया जाना जरूरी था।
रखरखाव के अभाव में सभी उच्च शिक्षण संस्थान खराब हो रहे हैं। निजी संस्थान अब प्रमुख खिलाड़ी हैं। वे अत्यधिक शुल्क लेते हैं। अगर थोड़ी सी फीस बढ़ा दी जाती है तो इतना असंतोष क्यों? विरोध करने वालों को यह महसूस करना चाहिए कि इतनी कम फीस में शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थान आने वाले समय में नष्ट हो जाएंगे।
पीआरओ डॉ. जया कपूर का कहना है कि सरकार की ओर से विश्वविद्यालयों को स्पष्ट संकेत दिए जा चुके हैं कि उन्हें अपने स्तर पर फंड का इंतजाम करना होगा और सरकार पर निर्भरता कम करनी होगी। कई अन्य संस्थाओं की तरह सरकार ने इविवि के फंड में भी कटौती की है। इविवि की फीस संरचना अब भी कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों से काफी कम है। विरोध करने वाले चंद छात्र नेता आंदोलन की आड़ में राजनीति में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।
छात्रों ने फूंका कुलपति का पुतला, निकाला मार्च
इविवि में फीस वृद्धि के विरोध में दिशा छात्र संगठन की ओर से बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय परिसर में ‘लानत जुलूस’ निकाला गया और छात्रसंघ भवन पर कुलपति का पुतला फूंका गया। छात्रों ने इविवि प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
इकाई समिति के सदस्य एवं और अनशन पर बैठे अंबरीश एवं चंद्रप्रकाश ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का यह रवैया गैर जिम्मेदाराना, अलोकतांत्रिक एवं तानाशाह चरित्र को उजागर करता है। संगठन के अविनाश ने चीफ प्रॉक्टर पर आंदोलन कर रहे छात्रों से बदसलूकी करने का आरोप लगाया।
छात्र नेताओं ने कहा कि हम अपने इस आंदोलन को सिविल सोसाइटी तक लेकर जाएंगे और छात्र, कर्मचारी, मजदूर एकता कायम करने की कोशिश करेंगे। इस मौके पर नीशू, शिवा, सूरज, धर्मराज, अनिल, संजय, अंशुरीष, सुरेश, रवि, आशीष आदि मौजूद रहे।