इलाहाबाद। नगर निगम में नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़े का खेल सिर्फ इलाहाबाद तक सीमित नहीं है। राजधानी लखनऊ में भी कुछ लोग इसमें शामिल हैं। बताया जा रहा है कि लखनऊ में कुछ सफेदपोश लोग इस खेल को अंजाम दे रहे हैं। इलाहाबाद में चिकित्सा विभाग का एक अधिकारी फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करता है। कम पढ़े-लिखे और सीधे-साधे युवाओं को उसके पास तक लाने का काम बेली गांव में रहने वाला ब्रोकर करता है। मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। इलाहाबाद नगर निगम ने विजलेंस से भी जांच कराने की तैयारी कर ली है।
सफाई कर्मचारी के पद पर फर्जी नियुक्ति पत्र का मामला 23 जुलाई को तब सामने आया जब एक व्यक्ति नगर निगम पहुंचा था। लखनऊ नगर निगम से सफाई कर्मचारी के पद पर सराय ममरेज के संदीप कुमार के नाम से जारी नियुक्ति पत्र में सितंबर में नगर निगम इलाहाबाद में ज्वाइंनिंग का जिक्र था। संदीप के परिजन नियुक्ति पत्र के संबंध में ही जानकारी लेने आए थे। महापौर और उसके बाद नगर आयुक्त के पास मामला पहुंचा। नियुक्ति पत्र देखकर उनके भी होश उड़ गए। नगर आयुक्त के निर्देश पर दो सदस्यीय कमेटी मामले की जांच कर रही है। पिछले दो दिनों में टीम के सदस्यों ने उस संबंध में चिकित्सा विभाग के अफसरों से संपर्क किया है।
इसके बाद मांडा में तैनात चिकित्सा विभाग के एक अधिकारी के खिलाफ फर्जीवाड़े के संबंध में कई चीजें पता चली हैं। सूत्रों के मुताबिक यह अधिकारी और बेली गांव के ब्रोकर ने मिलकर पिछले चार-पांच माह में ही करीब 28 युवाओं को फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर दिया। कुछ नियुक्ति पत्रों में इलाहाबाद नगर निगम में प्रमाण पत्र के सत्यापन का जिक्र है तो कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें प्रमाण पत्रों का सत्यापन लखनऊ नगर निगम में कराने का जिक्र है। यह भी पता चला है कि गैंग का सरगना चिकित्सा विभाग का अधिकारी एवं ब्रोकर ने फूलपुर के साथ मांडा, मेजा, नवाबगंज आदि के कुछ कम पढ़े-लिखे युवाओं को सफाई कर्मचारी के पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर 30 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक वसूले हैं। जांच टीम ने दावा किया कि फर्जीवाड़ा करने वालों का पता जल्द लगा लिया जाएगा।