अगर आप ने कृषि विभाग में पंजीयन कराया है और आपको सब्सिडी नहीं मिली है तो कृषि विभाग में संपर्क कर लीजिए। कृषि विभाग ने जिले में पंजीकृत सभी किसानों को सब्सिडी नहीं प्रदान की है। उसने अभी तक 12 हजार किसानों को ही सब्सिडी प्रदान की है। सैकड़ों पंजीकृत किसानों ने इसके लिए अब तक कृषि विभाग में शिकायत की है। फिलहाल उन्हें भरोसा दिया जा रहा है कि उनकी सब्सिडी उनके खाते में जल्दी ही भेज दी जाएगी।
कृषि विभाग ने इस साल किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी को पहले से बढ़ा दिया है। पंजीकृत किसानों को एक कुंतल गेहूं का बीज खरीदने पर दो हजार रुपये और चना, मटर और मसूर जैसी दलहनी फसलों का बीज खरीदने पर (एक कुंतल पर) पांच हजार रुपये की सब्सिडी भुगतान की घोषणा की है। इसका फायदा जिले के एक लाख पंजीकृत किसानों को मिलना है, लेकिन अभी तक 12 हजार किसानों को ही मिल सका है। कृषि विभाग ने किसानों को सब्सिडी देने के लिए इस बार एक अलग व्यवस्था की है। छात्रों की तरह किसानों को भी ऑनलाइन सब्सिडी दिए जाने की व्यवस्था कर दी है। अब जो भी पंजीकृत किसान हैं, उनकी सब्सिडी को ऑनलाइन उनके खाते में भेज दी जा रही है।
जिन किसानों को सब्सिडी दी जा रही है, उनका पंजीयन इस बार गेहूं, चना, मटर, सरसों आदि की बुआई के समय ही शुरू कर दिया गया था। तीन महीने तक चले पंजीयन अभियान में कुल एक लाख किसानों ने अपना पंजीयन कराया है, उनमें से अभी 12 हजार किसानों को ही सब्सिडी प्रदान गई है। जिला कृषि अधिकारी गणेश प्रसाद कहते हैं कि बाकी किसानों की सब्सिडी को शासन सीधे उनके एकाउंट मेें भेजेगा। जिला मुख्यालय से सब्सिडी का कोई लेना-देना नहीं है।
फिलहाल जिले में एक लाख पंजीकृत किसानों के मुकाबले उनकी संख्या चार गुना ज्यादा है। कृषि विभाग का अनुमान है कि वर्तमान में किसानों की चार लाख से अधिक है। हालांकि सभी का पंजीयन नहीं हो सका है। जिला कृषि अधिकारी गणेश प्रसाद कहते हैं कि पंजीयन की प्रक्रिया जारी है।