इलाहाबाद (ब्यूरो)। चार हजार से अधिक उपनिरीक्षकों और प्लाटून कमांडर की भर्ती परीक्षा में व्हाइटनर प्रयोग करने के मामले में एक नया मोड़ आ गया है। परीक्षा में व्हाइटनर लगाने वालों को हाईकोर्ट के आदेश से चयन सूची से बाहर कर दिया गया था। बाद में सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर उनको वापस सेवा में लिया गया। अब इसी आधार पर कुछ और लोगों ने भी याचिका दाखिल कर दावा किया है कि उनके अंक व्हाइटनर लगाने वाले लोगों से अधिक थे, मगर उन्होंने भी उत्तर पुस्तिकाओं में व्हाइटनर प्रयोग किया था इसलिए उनका चयन नहीं हो सका था। समानता के आधार पर ऐसे अभ्यर्थियों ने भी चयन की मांग की है। राजेश कुमार यादव और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बी अमित स्थालकर ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।
याची के वकील सीमांत सिंह के अनुसार 16 मार्च 2015 को जारी परिणाम में 810 ऐसे लोगों का चयन किया गया, जिन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं में रोक के बावजूद व्हाइटनर का प्रयोग किया। हाईकोर्ट के आदेश से इन सभी का चयन रद्द कर 25 जून 2015 को नया परिणाम जारी किया गया। बाहर किए गए 810 लोग हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध सुप्रीमकोर्ट चले गए। सुप्रीमकोर्ट ने सभी अभ्यर्थियों को एक अवसर देते हुए सेवा वापस लेने का आदेश दिया। याचीगण का कहना है कि उनका चयन भी व्हाइटनर इस्तेमाल करने के कारण नहीं किया गया था, मगर कट ऑफ लिस्ट में उनकी मेरिट चयनित व्हाइटनर वालों से अधिक है, इसलिए समानता के आधार पर उनको भी चयन का मौका दिया जाए।