महाराष्ट्र के शनि तीर्थ शनि शिगनापुर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक को लेकर अब ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भी मुहर लगा दी है। उन्होंने दो टूक कहा है कि धर्म मान्यताओं और परंपराओं पर चलता है, इसमें सामाजिक न्याय जैसी कोई बात नहीं होती।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा, शनि क्रूर ग्रह है, इसलिए महिलाओं को उनकी दृष्टि से बचते हुए उनकी पूजा नहीं करनी चाहिए। शनि कोई देवता नहीं बल्कि ग्रह हैं। निर्णय सिंधु में स्पष्ट लिखा है कि शनिपूजा महिलाओं के लिए अमंगलकारी है। शनि की पूजा से उनके माथे का सिंदूर मिट सकता है। वस्तुत: साईं पूजा की तरह ही शनि पूजा का प्रचार भी सिर्फ कमाई के लिए किया जा रहा है।