राज्य समाज कल्याण बोर्ड में चेयरमैन के पद पर पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल की बहू रूपल अग्रवाल की नियुक्ति का मामला विवादों में घिर गया है। नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार सहित रूपल अग्रवाल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले की सुनवाई 25 फरवरी को होगी।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रतिमा ने इस मामले में जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। याची का कहना है कि राज्य समाज कल्याण बोर्ड में चेयरमैन के पद के लिए राज्य सरकार ने तीन नाम केंद्र सरकार को भेजे थे।
इसमें रूपल अग्रवाल, रेनू सिंह और अलका चौधरी का नाम शामिल है। रेनू सिंह का नाम फाइनल कर दिया गया। इसके बाद उपनिदेशक केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड ने एक अक्तूबर 2015 को रूपल अग्रवाल को चेयरमैन के पद पर नियुक्त कर दिया। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई कि और रूपल अग्रवाल ने पदभार ग्रहण भी कर लिया।
याचिका में आरोप है कि पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल की बहू होने के कारण रेनू सिंह का नाम काटकर रूपल अग्रवाल को नियुक्ति दी गई। इससे पूर्व इस पद पर दिव्या मिश्रा पिछले दस वर्षों से थीं। केंद्र सरकार के अधिवक्ता मृत्युंजय तिवारी का कहना था कि चेयरमैन की नियुक्ति योग्यता और अनुभव के आधार पर प्रक्रिया के तहत की गई है। इसमें कुछ भी अनियमितता नहीं है।