माघ मेला के पहले स्नान पर्व मकर संक्रांति पर आने वाले लाखों स्नानार्थियों की हिफाजत के लिए सुरक्षा घेरा कस दिया गया है। एंटी टेररिस्ट स्कवॉयड, एसटीएफ, क्राइम ब्रांच के साथ ही रैपिड एक्शन फोर्स और पीएसी की टुकड़ियों ने मेला क्षेत्र में मोर्चा संभाल लिया। केंद्रीय और स्थानीय खुफिया शाखाओं के गुप्तचर भी मेला में सक्रिय हैं। मेला के साथ ही जिले के होटलों-ढाबों और धर्मशालाओं की भी निगरानी हो रही है।
मकर संक्रान्ति का पर्व पठानकोट एयरबेस हमले के कुछ ही दिन बाद होने की वजह से आतंकी हमले के खतरे को लेकर शासन स्तर से सुरक्षा इंतजाम की निगरानी हो रही है। पिछले तीन रोज में पुलिस और एटीएस ने अलग-अलग आतंकी हमला होने पर बचाव और जवाबी कार्रवाई का रिहर्सल किया। बुधवार को दमकल दस्ते ने भी टेंटों में भीषण आग लगने की स्थिति में राहत कार्य का मॉक ड्रिल किया। मेले में 12 पुलिस थाने, 34 चौकियां, ग्यारह फायर स्टेशन बनाए गए हैं। पहले स्नान पर्व पर भीड़ के नियंत्रण के लिए ट्रैफिक पुलिस ने भी स्कीम तैयार कर ली है।
भगदड़ नहीं होने पाए इसके लिए भी मंथन किया गया। आईजी, डीआईजी और एसएसपी ने मेले में पुलिस व्यवस्था का जायजा लिया और हिदायत दी कि सुरक्षा व्यवस्था तो कड़ी रहे लेकिन बाहर से आए लोगों के साथ बदसलूकी नहीं हो। पांटून पुलों के दोनों तरफ पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। खुफिया एजेंसियों के गुप्तचरों की सक्रियता के साथ ही कंट्रोल रूम में बैठे पुलिसकर्मी मेले में सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी निगरानी कर रहे हैं। देश भर से ऐसे स्पाटर्स बुलाए गए हैं जो आतंकवादी गिरोहों और उनके शामिल आतंकियों के बारे में खासी जानकारी रखते हैं। एंटी सबोटाज चेक टीम, एंटी माइंस टीम, बम डिस्पोजल स्कवायड, मेटल टीम, डिटेक्टर टीम, स्पार्टस और फोटोग्राफ्स टीम को सक्रिय किया गया है।
माघ मेला में स्नानार्थियों को डूबने से बचाने के लिए संगम समेत सभी घाटों पर 30 नावों पर जल पुलिस के गोताखोरों की तैनाती की गई है। ये गोताखोर भोर में चार बजे से ही नावों पर मुस्तैद हो जाएंगे। जल पुलिस की स्टीमर और बोट भी तैनात रहेगी।