भारतीय ज्ञानपीठ के पूर्व निदेशक और प्रख्यात कथाकार रवींद्र कालिया की स्मृतियों को संजोने का सिलसिला जारी है। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के क्षेत्रीय केंद्र में हुई शोक सभा में केंद्र प्रभारी प्रो.संतोष भदौरिया ने कहा, ‘खुदा सही सलामत है’, ‘एबीसीडी’, ‘17 रानाडे रोड’ जैसी कालजयी कृतियों के रचनाकार रवींद्र कालिया उम्दा गद्यकार और बड़े इंसान थे। वर्तमान में वह विवि कार्यपरिषद के सदस्य भी थे।
उनका मार्गदर्शन हमेशा विवि को मिलता रहा। मेरी शब्द यात्रा कार्यक्रम में उन्होंने अपने जीवन के विरल अनुभव साझा किए। वह साझा संस्कृति के हिमायती थे। इस अवसर पर दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। सभा में डॉ.सालेहा जर्रीन, डॉ.अनुपमा राय, डॉ.सपना सिंह, सूर्या ईवी, नीलाभ, मनोज सिंह, रश्मि आदि मौजूद रहीं।
हिंदुस्तानी एकेडेमी की शोक सभा में भी रवींद्र कालिया के व्यक्तित्व और कृतित्व को रेखांकित किया गया। एकेडेमी अध्यक्ष सुनील जोगी ने रवींद्र कालिया के निधन को साहित्य की अपूरणीय क्षति बताया। कहा, इसे पूरा नहीं किया जा सकता। कोषाध्यक्ष रविनंदन सिंह ने कहा, कालिया जी नए से नए रचनाकारं को हमेशा प्रोत्साहित करते थे। उनकी रचनाएं दिल को छू जाने वाली है। उन्होंने हमेशा सामाजिक सरोकारों को महत्व दिया। एकेडमी सचिव बृजेश चंद्र ने कहा कि कालिया की कहानी ‘चौकड़ी’ ने हिंदी कहानी को नयी दिशा दी।
हिंदी कहानी ने एक नया आयाम हासिल किया। प्रकाशन अधिकारी ज्योतिर्मयी, मीनूरानी दूबे ने भी संस्मरण साझा किए। कार्यक्रम में डॉ.जूही शुक्ला, नंदल हितैषी, विवेक सत्यांशु, नरेश सिंह गौड़, डॉ.ऊषा मिश्रा, डॉ. फाजिल हाशमी, गोपालजी पांडेय, शिवनारायण पांडेय, रतन पांडेय, सुनील कुमार आदि मौजूद रहे।
भारतीय ज्ञानपीठ के पूर्व निदेशक और वरिष्ठ कथाकार रवींद्र कालिया का अस्थिकलश मंगलवार को संगम में विसर्जित किया जाएगा। बेटे प्रबुद्ध कालिया अस्थिकलश लेकर सोमवार की रात दुरंतो एक्सप्रेस से चलकर मंगलवार की सुबह इलाहाबाद पहुंचेंगे। वह स्टेशन से सीधे संगम जाएंगे जहां अस्थि विसर्जन के बाद मेहंदौरी आवास पर आएंगे। यहां कुछ देर रुकने और अनेक करीबियों से मुलाकात के बाद वह रात में प्रयागराज एक्सप्रेस से लौट जाएंगे।