राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) एवं राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (जीजीआईसी) की ओर से पहली बार हुए पुराने छात्रों के सम्मान समारोह में वर्षों बाद एक मंच जुटे पुरनियों ने एक-दूसरे से उनकी यादें ताजा की। इस सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए कोई पुराछात्र त्रिपुरा से पहुंचा तो कोई दिल्ली, पंजाब, देहरादून सहित देश के अलग-अलग भागों से पहुंचा। साथ ही कई स्थानीय विभूतियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
सभी के मन में यह उल्लास था कि वह एक बार फिर से अपने कुछ पुराने साथियों से मिल सकेंगे। इन विभूतियों के सम्मान के साथ जीआईसी में पढ़ रहे वर्तमान छात्रों को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि वह किसी से कम नहीं, सही दिशा में उनकी ओर से की गई मेहनत सार्थक परिणाम देगी।
मेधावी पुराछात्र सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से राजकीय इंटर कॉलेज के पुराछात्रों को एक मंच पर लाने की पहल सराहनीय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य तथा शिक्षकों ने पुराछात्रों का जो सम्मान किया है, वह सराहनीय है। उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ जीआईसी के ध्वजारोहण के साथ किया। उन्होंने बताया कि जीआईसी के झंडे में ज्ञान, स्वतंत्रता और सेवा की सीख का संकल्प लेने की बात कही गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि जीआईसी में केवल कक्षा की शिक्षा ही नहीं ग्रहण की बल्कि मानवीय मूल्याें को सीखने का अवसर मिला। न्यायमूर्ति दिलीप कुमार गुप्ता ने जीआईसी में अपने छात्र जीवन की यादें ताजा की। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव एवं विधायक संग्राम सिंह यादव ने अपने छात्र जीवन के अनुभवाें को वर्तमान छात्रों से साझा किया। अतिथियों का स्वागत संयुक्त शिक्षा निदेशक इलाहाबाद मंडल महेंद्र कुमार सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि देश के कोने-कोने से आए पुराछात्र अपने अनुभव से हमारे छात्रों का मार्गदर्शन करें, हमारे लिए यह उनका उपहार है।
इससे पहले जीआईसी का ध्वजारोहण न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल, सांसद धर्मेंद्र यादव, विधायक संग्राम सिंह यादव एवं प्रशांत सिंह ने किया। समारोह में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, क्रास्थवेट गर्ल्स इंटर कॉलेज, डीपी गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति से अतिथियों को मुग्ध कर दिया। समारोह की एक-एक लड़ियों को एक-दूसरे से जोड़ते हुए संचालन जीआईसी के वरिष्ठ शिक्षक प्रभाकर त्रिपाठी ने किया। अतिथियों को स्मृति चिह्न जीआईसी के प्रधानाचार्य रणवीर सिंह और जीजीआईसी की प्रधानाचार्या शशिबाला चौधरी सहित एडीआईओएस गोविंद राम, संजय कुशवाहा सहित अन्य अधिकारियों ने किया। अंत में धन्यवाद डीआईओएस कोमल यादव ने किया।
जीआईसी-जीजीआईसी की ओर से आयोजित पुराछात्र सम्मान समारोह में अपनी सहमति देने के बाद भी कई न्यायमूर्ति एवं विशिष्ट अधिकारी नहीं पहुंचे। समारोह में आईएएस विवेक जोशी, हिमांशु त्रिपाठी एवं आईपीएस मोहम्मद फैयाज फारूकी को छोड़कर कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुंचा। इस बात को लेकर पूरे समारोह में चर्चा होती रही। समारोह पर सरकार एवं पार्टी विशेष की छाप की जानकारी होने के कारण बड़ी संख्या में अधिकारियों ने इस कार्यक्रम से किनारा कर लिया।
जीआईसी से 1982 में बारहवीं पास करने वाले कर्नल सुधीर पाराशर ने कहा की भारतीय सेना में उन्होंने 32 साल सेवा की है। इस दौरान सेना ने उन्हें अनुशासन, ईमानदारी और मेहनत करने की करने की सीख दी। उन्होंने जीआईसी-जीजीआईसी के छात्र-छात्राओं से सेना की अपनी दुर्गम पोस्टिंग के दौरान हुई यादों को ताजा किया। उन्होंने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान उन्हें छह-छह गोली लगी, उनमें से कुछ अभी उनके शरीर में ही पड़ी हैं।
बीएसएफ में आईजी के रूप में त्रिपुरा में तैनात शहर के मूल निवासी और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी मो. फैयाज फारूकी ने बच्चों के चरित्र निर्माण के प्रति शिक्षकों एवं अभिभावकों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी भटक रही है। इसके चरित्र निर्माण के बिना आने वाला समाज भटक जाएगा। उन्होंने कहा कि सच हमारी किताबों से गायब हो गया है।