आठ बार विधायक रह चुके हैं रेवती रमण
दरअसल, रेवती रमण सिंह आठ बार विधायक रहे हैं। इसके अलावा इलाहाबाद संसदीय सीट से वह लगातार दो बार लोकसभा पहुंचे। एक बार वह राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं। इस वजह से भाजपा उन्हें कमजोर नहीं मान रही है। इसी को देखते हुए पार्टी अब इसी सीट से ऐसे उम्मीदवार का नाम घोषित कर सकती है जो क्षेत्र का जाना पहचाना नाम हो। पार्टी के नेताओं का कहना है कि इस सीट से भाजपा किसी ब्राह्मण उम्मीदवार को उतार सकती है। हालांकि, यह अभी सिर्फ कयासबाजी ही है।
बता दें कि 2004 के चुनाव में केंद्र में एनडीए सरकार होने के बावजूद भाजपा से डाॅ. मुरली मनोहर जोशी इलाहाबाद संसदीय सीट से चुनाव हार गए थे, इसे देखते हुए इस सीट को हल्के में लेने का भाजपा जोखिम नहीं उठा रही है। इसी वजह से पार्टी ने इलाहाबाद के साथ फूलपुर और कौशाम्बी में अपने प्रत्याशी का अंतिम रूप से चयन नहीं किया है।
भाजपा से कई दावेदार कतार में
इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र की बात करें तो यहां से वर्तमान सांसद डाॅ. रीता बहुगुणा जोशी, पूर्व महापौर अभिलाषा गुप्ता, विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राधा कांत ओझा, केशरी नाथ त्रिपाठी के पुत्र नीरज त्रिपाठी, रईस चंद्रा शुक्ला, हरि कृष्ण शुक्ला, डाॅ. एलएस ओझा आदि का नाम टिकट के दावेदारों में चल रहा है।
सांसद रीता की बात करें तो उनके पिता हेमवती नंदन भी इलाहाबाद सीट से सांसद रह चुके हैं। अभिलाषा गुप्ता प्रयागराज से लगातार दो बार मेयर रह चुकी हैं और उनके पति एवं कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी भी इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी के पिता अशोक बाजपेयी भी यहां से चुनाव लड़ चुके हैं। उनका कारोबार भी यमुनापार में ही फैला हुआ है।