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खुली अदालत में सुनवाई की घोषणा का स्वागत पर संशय कायम

Tue, 05 May 2020 09:22 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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court - फोटो : prayagraj
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में आठ मई से खुली अदालत में मुकदमों की सुनवाई की घोषणा से अधिवक्ता उत्साहित हैं। मगर तमाम लोगों को आशंका भी है कि कहीं वकीलों का उत्साह उन पर भारी न पड़ जाए। आशंका है कि यदि ज्यादा संख्या में वकील जुटे तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुश्किल होगा। अधिवक्ता संगठनों ने न्यायालय प्रशासन को सुनवाई प्रक्रिया व स्थिति को स्पष्ट करने का सुझाव दिया है। 
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लॉक डाउन में देश में पहली कोर्ट है, जिसने खुली अदालत में सुनवाई की शुरूआत का फैसला लिया है। यंग लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष कुमार त्रिपाठी ने महानिबंधक से अनुरोध किया है कि आठ मई को केवल उन्हीं वकीलों को परिसर में प्रवेश की अनुमति दें, जिनके मुकदमे कोर्ट में लगे हों। वकीलों के चेम्बर्स हर हाल में बंद रखे जाएं। अधिवक्ता समन्वय समिति के अध्यक्ष बी एन सिंह कहते हैं कि न्यायालय प्रशासन न्यायिक कार्य प्रणाली एवं व्यवस्था योजना को सार्वजनिक कर उस पर कड़ाई से अमल कराए।

कांस्टीट्यूशनल एण्ड सोशल रिफार्म के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता एएन त्रिपाठी का कहना है कि मुकदमों की सुनवाई खुली अदालत में की जाए और प्रत्येक अदालत एक-दूसरे से सौ फीट दूर रखी जाए। बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रहे अधिवक्ता एस के गर्ग का कहना है कि कोर्ट के भीतर तीन सीट के गैप से अधिवक्ताआें के बैठने की व्यवस्था की जाए। 
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आदर्श अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एससी मिश्र व प्रयागराज अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार चटर्जी ने संयुक्त रूप से कहा है कि विभागीय अधिवक्ता सूचना के अभाव में कोर्ट में नहीं पहुंच पाते तो याचिका एक पक्षीय तय न की जाए।

सोशल मीडिया में खुली अदालत में सुनवाई की मांग को लेकर वकीलों ने अभियान छेड़ा था। जिसका सकारात्मक परिणाम आने से वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश का आभार व्यक्त किया है। सोशल मीडिया के जरिये खुली अदालत में सुनवाई की मांग करने वाले वकीलों में राजीव शुक्ला, ऋतेश श्रीवास्तव, दिलीप पांडेय, विजय चंद्र श्रीवास्तव, संतोष कुमार मिश्र, बैजन्त मिश्र, राजीव द्विवेदी, सुशील कुमार तिवारी, जितेन्द्र सरीन, महासचिव प्रभाशंकर मिश्र, महासचिव जे बी सिंह, अजय कुमार मिश्र, दिनेश मिश्र आदि सैंकडों अधिवक्ता जुडे हुए थे। सभी ने प्रदेश में न्याय व्यवस्था को नये सिरे से शुरू करने का स्वागत किया है और आशा जाहिर की है कि यदि प्रयास सफल हुआ तो इसे अधीनस्थ न्यायालयों तक लागू किया जाएगा।
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