हाईकोर्ट ने प्रदेश के ऐसे स्थानीय निकायों को कड़ी चेतावनी दी है जिन्होंने मांगे जाने के बावजूद अपने नियंत्रण वाले पार्कों और खेल मैदानों की सूचना उपलब्ध नहीं कराई है। नगर निगमों, नगर महापालिका परिषदों, नगर पंचायतों सहित विकास प्राधिकरणों को भी कहा है कि वह तीन माह के भीतर सूचनाएं उपलब्ध करा दें वरना जिम्मेदार अफसरों पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने पार्कों, खुले मैदानों और खेल मैदानों पर कब्जे तथा अतिक्रमण होने की घटनाओं को काफी गंभीरता से लिया है।
जोया जुनैद की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह उत्तर प्रदेश पार्क, प्ले ग्राउंड एंड ओपेन स्पेस(प्रिजर्वेशन एंड रेग्युलेशन) एक्ट 1975 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन कराएं। जिन स्थानीय निकायों ने अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में स्थित पार्कों और खेल मैदानों की सूचना उपलब्ध करा दी है वह तत्काल इस पर अमल प्रारंभ कर दें।खंडपीठ ने इससे पूर्व प्रदेश भर के स्थानीय निकायों से पार्को, खुले मैदानों और खेल मैदानों की जानकारी मांगी थी। जवाब में नगर निगमों को छोड़कर शेष निकायों ने अधूरी सूचनाएं दी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदेश में 6276 पार्क, 3617 खुले मैदान तथा 98 खेल मैदान हैं। 197 नगर पालिका परिषदों में से मात्र 89 ने सूचना उपलब्ध कराई है। इसी तरह से 436 नगर पंचायतों में से 189 ने सूचनाएं दी हैं। सूचना नहीं देने वालों निकायों को कड़ी चेतावनी देते हुए तीन माह की और मोहलत दी गई है।