सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में तमाम अनियमितताओं के आरोपों में दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा सेवा आयोग और प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।
कोर्ट ने आयोग से पूछा है कि किन परिस्थितियों में प्रश्नपत्र में इतनी सारी गड़बड़ियां हुईं हैं और ऐसा करने के लिए दोषी लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। विशेषकर जब आयोग को इस कार्य के लिए विशेषज्ञ संस्था माना जाता है।
सुरेंद्र कुमार और आठ अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी सुनवाई कर रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को होगी। याचिका में कहा गया है कि असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए जारी विज्ञापन के मुताबिक भर्ती परीक्षा 200 अंकों की लिखित तथा 30 अंकों का साक्षात्कार था।
परीक्षा में पूछे गए 70 प्रश्नों में सी सीरीज की बुकलेट में एक ही गाइड से 62 प्रश्न पूछे गए। बाद में आयोग ने इनमें से 15 प्रश्नों को डिलीट कर दिया। लिखित परीक्षा पांच जनवरी 2019 को हुई। अंतिम परिणाम 13 जनवरी 2020 को जारी किया गया।
परीक्षा में प्रति प्रश्न अंकों का वितरण गलत तरीके से किया। इसी मामले में एक और याचिका कोर्ट में लंबित है, जिसमें अदालत ने आयोग को चयन प्रक्रिया पूरी करने की छूट दी है, मगर चयन परिणाम याचिका पर होने वाले निर्णय पर निर्भर करेगा।
कोर्ट ने आयोग को अगली तारीख पर जवाब दाखिल करने और याची को प्रतिउत्तर दाखिल करने का आदेश दिया है। सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी।