पुलिस का काम सजा दिलाना नहीं, निष्पक्ष जांच करना
अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस का उद्देश्य केवल किसी आरोपी को सजा दिलाना नहीं होना चाहिए। पुलिस की जिम्मेदारी निष्पक्ष तरीके से जांच कर वास्तविक तथ्य सामने लाना है, ताकि दोषी तक कानून पहुंचे और निर्दोष व्यक्ति को गलत जांच के कारण परेशानी न उठानी पड़े।
कोर्ट ने इसी उद्देश्य से विवेचकों के लिए कई दिशा-निर्देश भी दिए हैं। इनमें घटना की सूचना मिलने के बाद जल्द मौके पर पहुंचना, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित करना, आवश्यक मामलों में मोबाइल और विधि-विज्ञान संबंधी साक्ष्य जुटाना तथा जरूरत के अनुसार पहचान की कार्रवाई करना शामिल है।
अदालत ने यह भी कहा कि जिन मामलों में मोबाइल में मौजूद सामग्री, बातचीत या किसी व्यक्ति की स्थिति जांच के लिए महत्वपूर्ण हो, वहां संबंधित डिजिटल साक्ष्य और दूरभाष विवरण का निष्पक्ष तरीके से संकलन किया जाना चाहिए। आपत्तिजनक वीडियो से जुड़े मामलों में भी मोबाइल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की विधिवत जांच के निर्देश दिए गए हैं।
दहेज हत्या के मामले में सास को जमानत
चंद्रकांता ने आगरा के बसौनी थाने में दर्ज दहेज से जुड़े मामले में जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। अदालत ने प्राथमिकी और धारा 180 के तहत दर्ज बयान में अंतर पाया। साथ ही अदालत ने माना कि आवेदिका के खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं तथा मृतका की मौत से पहले उसके साथ दहेज उत्पीड़न किए जाने के पर्याप्त प्रथमदृष्टया साक्ष्य सामने नहीं आए हैं।
अदालत ने चंद्रकांता का कोई आपराधिक इतिहास नहीं होने और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए उसे सशर्त जमानत दे दी। आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को भेजने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि जांच संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।