अर्जी में यह भी दावा किया गया है कि मस्जिद के स्तंभ के निचले हिस्से पर हिंदू धार्मिक प्रतीक और नक्काशी भी दिखाई देती है। इसे देखते हुए कोर्ट तीन अधिवक्ताओं का एक एडवोकेट कमीशन नियुक्त कर जांच के निर्देश दे। पूरी कार्यवाही की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई जाए।
विवादित मामले के मूल वाद भगवान श्री कृष्ण विराजमान कटरा केशव देव के नाम से रंजन अग्निहोत्री ने दाखिल किया है। इससे जुड़ी सभी 18 याचिकाओं में 12 अक्तूबर 1968 को शाही ईदगाह मस्जिद को 13.37 एकड़ जमीन देने के समझौते को अवैध बताया गया है। इस जमीन को भगवान श्री कृष्ण विराजमान को लौटाने की मांग की गई है। शाही ईदगाह मस्जिद को भी हटाने की मांग की गई है। सभी 18 वादों में शाही ईदगाह मस्जिद, यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, श्री कृष्ण जन्मभूमि सेवा संघ और श्री कृष्ण जन्मभूमि संघ को पक्षकार बनाया गया है।
जन्मभूमि के इतिहास का आदेश में उल्लेख
कोर्ट ने आदेश में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के इतिहास भी जिक्र किया है। कहा है, 5132 साल पहले भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कंस के मथुरा कारागार में जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, उसे कटरा केशव देव के नाम से जाना जाता है। 1618 ईस्वी में ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण कराया था। मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर ध्वस्त कर शाही ईदगाह मस्जिद बनवा दी। बाद में, गोवर्धन युद्ध के दौरान मराठा शासकों ने आगरा-मथुरा पर आधिपत्य जमा लिया और श्रीकृष्ण मंदिर का फिर से निर्माण करा दिया। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने 1803 में 13.37 एकड़ भूमि नजूल की घोषित कर दी। 1815 में बनारस के राजा पटनीमल ने यह जमीन अंग्रेजों से खरीद ली। मुस्लिम पक्ष के स्वामित्व का दावा खारिज होकर 1860 में बनारस राजा के वारिस राजा नरसिंह दास के पक्ष में डिक्री हो गया। हालांकि विवाद चलता रहा।
1920 में मुस्लिम पक्ष को लगा था झटका
जिला अदालत से 1920 में मुस्लिम पक्ष को झटका लगा। कोर्ट ने कहा, 13.37 एकड़ जमीन पर मुस्लिम पक्ष का कोई अधिकार नहीं है। इसके बाद 1935 में शाही ईदगाह मस्जिद के केस को एक समझौते के आधार पर फिर से तय किया गया। 1944 में पूरी जमीन पंडित मदनमोहन मालवीय और दो अन्य को बैनामा कर दी गई। उद्योगपति जेके बिड़ला ने भूमि की कीमत अदा की। 21 फरवरी 1951 को श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट बना लेकिन 1958 में वह अर्थहीन हो गया। इसी साल मुस्लिम पक्ष का एक केस खारिज कर दिया गया। 1977 में श्रीकृष्ण जन्म स्थान सेवा संघ बना, जो बाद में सेवा संस्थान बन गया।
मई में 18 केस ट्रांसफर का हुआ था आदेश
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र की पीठ ने 26 मई 2023 को जन्मभूमि विवाद से जुड़े सभी 18 वादों को मथुरा जिला अदालत से हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। इसके बाद से ही हाईकोर्ट प्रकरण की सुनवाई कर रहा है।