महाधिवक्ता ने कहा कि अनुदेशकों की तैनाती एक वर्ष की संविदा पर होती है और कार्य संतोषजनक होने पर नवीनीकरण का नियम है। अनुदेशकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचएन सिंह और अधिवक्ता दुर्गा तिवारी ने कोर्ट में पक्ष रखा। बताया कि एकलपीठ ने याचियों को 17 हजार मानदेय देने का आदेश दिया है। लेकिन, राज्य सरकार ने 17000 मानदेय देने के आदेश का पालन नहीं किया।
इसके जवाब में राज्य सरकार का कहना था कि केंद्र सरकार की ओर से पूरी राशि नहीं दी गई है। जबकि, केंद्र ने बताया है कि हमने पूरी राशि दी है। प्रदेश के लगभग 27 हजार अनुदेशकों का मानदेय 2017 में केंद्र सरकार ने बढ़ाकर 17000 रुपये कर दिया था, जिसको प्रदेश सरकार ने लागू नहीं किया है।
पूर्व में एकल पीठ के समक्ष याची विवेक सिंह, आशुतोष शुक्ला और भोला नाथ पांडेय की ओर से याचिका दाखिल की गई थी। इस पर कोर्ट ने अनुदेशकों को 2017 से 17000 मानदेय सहित नौ प्रतिशत ब्याज भी देने का आदेश दिया है। इसी फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने विशेष अपील दाखिल की है।