यह था मामला
याचिका में कहा गया है कि एएनएम के 9600 पदों पर भर्ती के लिए जो विज्ञापन निकाला गया था, उसमें प्रारंभिक अर्हता परीक्षा पास करने की अनिवार्यता निर्धारित की गई थी। जो अभ्यर्थी प्रारंभिक अर्हता परीक्षा पास करेंगे, उन्हें ही मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया जाएगा। मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए पांच जनवरी तक आवेदन करने की तिथि निर्धारित की गई।
याची केअधिवक्ता ने तर्क दिया था कि दो वर्षों से लगातार कोरोना संक्रमण बने रहने से बहुत से अभ्यर्थियों को अस्पतालों से छुट्टी नहीं दी गई। इस वजह से उन्हें अध्ययन का मौका नहीं मिल सका। लिहाजा, मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रारंभिक अर्हता परीक्षा पास करने की अनिवार्यता सही नहीं है। आयोग द्वारा निर्धारण मनमाना और भेदभावपूर्ण है। इस परीक्षा का कोई औचित्य नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने जवाब दाखिल करने को कहा था।