ट्रायल कोर्ट को भी सलाह
अदालत ने कहा कि समय पर जमानत आवेदन दायर न करने से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कानूनी सहायता नहीं मिली। न्यायालय ने इस उद्देश्य के लिए समयसीमा प्रदान करते हुए इस बात पर जोर दिया कि ट्रायल कोर्ट/मजिस्ट्रेट, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और जेल प्राधिकारियों पर यह दायित्व डाला गया है कि वे प्रत्येक घटना पर प्रत्येक कैदी की कानूनी सहायता की आवश्यकता की सक्रियतापूर्वक और स्वतंत्र रूप से जांच करें।