यह फैसला 16 नवंबर को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनाया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आवंटित जमीन के बड़े हिस्से पर बिल्डर को वास्तविक कब्जा देने विफल रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रुद्र बिल्डवेल बिल्डर मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को दोहरा झटका दिया है। कोर्ट ने बिल्डर की दो आवासीय परियोजनाओं के लिए शून्यकाल के लाभ की मांग वाली दो याचिकाओं को एक साथ स्वीकृत करते हुए नोएडा प्राधिकरण को आदेश दिया कि बिना किसी न नुकुर के बिल्डर को जीरो पीरियड का लाभ प्रदान किया जाए।
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यह फैसला 16 नवंबर को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनाया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आवंटित जमीन के बड़े हिस्से पर बिल्डर को वास्तविक कब्जा देने विफल रहा है। यह प्राधिकरण की गलती है, ना की बिल्डर की, इसलिए याची बिल्डर आवंटन की तारीख से अप्रैल 2023 तक शून्यकाल का लाभ पाने के साथ ही लीज रेंट और उस पर लगने वाले ब्याज से छूट पाने का हकदार है।
क्या है पूरा मामला
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने रुद्र बिल्डवेल को सेक्टर-1 और सेक्टर-16 में जमीन आवंटित की थी। प्राधिकरण ने 18 अगस्त 2010 को शुभकामना बिल्डटेक के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम को 81,800 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की थी। इसमें रुद्र बिल्डवेल भी शामिल था। मार्च 2011 में भूमि का उप-विभाजन किया गया। इसमें याची रुद्र बिल्डवेल कंपनी को 33,538 वर्गमीटर जमीन आवंटित की गई।
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कंपनी ने 39 करोड़ रुपये की कुल प्रीमियम राशि का 10 प्रतिशत भुगतान कर लीज करा ली थी, लेकिन आवंटित भूमि के बड़े हिस्से पर उसे वास्तविक कब्जा नही दिया गया था। लेकिन अब इस फैसले के बाद प्राधिकरण को ने सिर्फ याची बिल्डर को जीरो पीरियड का लाभ देना होगा बल्कि बिल्डर के नक्शे को भी दोबारा पास करना होगा।