इलाहाबाद हाईकोर्ट ने घोसी के सांसद अतुल राय की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अगर जेल में है तो इससे गैंगस्टर की कार्रवाई को रोका नहीं की जा सकता है। यह स्वीकार नहीं किया जा सकता है कि वर्तमान प्राथमिकी उस जांच अधिकारी या किसी भी पुलिस प्राधिकरण के द्वेष का परिणाम है, जिसे दो साल पहले इस न्यायालय के समक्ष अवमानना कार्यवाही में बुलाया गया था। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति साधना रानी (ठाकुर) की खंडपीठ ने घोसी सांसद की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
घोसी सांसद ने हाईकोर्ट के समक्ष 23 अक्तूबर 2021 को अपने खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत वाराणसी के लंका थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता जेल में है और उसकी जमानत अर्जी खारिज होने के कारण उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने यह कहा कि याची पर पहले से दर्ज चार आपराधिक मामलों में मुकदमा चल रहा है।
इसलिए एफआईआर रद्द करने का कोई कारण नहीं बनता है। मामले में याची के अधिवक्ता ने बताया कि याची 2017 के मामले में जमानत पर जेल से बाहर है। उसके खिलाफ 2019 में एक अन्य मामले में 420, 376, 504 और 506 के तहत रिपोर्ट दर्ज है। इस मामले में याची जेल में है। उसकी जमानत अर्जी खारिज की जा चुकी है। लिहाजा, याची पर गैंगस्टर के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने याची के अधिवक्ता का तर्क मामने से इनकार कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया।