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रूल ऑफ लॉ का जीवंत उदाहरण है उच्च न्यायालय

Mon, 14 Mar 2016 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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हाईकोर्ट के डेढ़ सौवें स्थापना दिवस समारोह पर पहुंचे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर सहित सभी अतिथियों ने हाईकोर्ट के गौरव का बखान किया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, इलाहाबाद हाईकोर्ट दुनिया का सबसे बड़ा न्याय का मंदिर है। इसने न्याय के उच्च मानकों और परंपराओं को जीवित रखा है। इलाहाबाद बुद्धिजीवियों का शहर है। स्वतंत्रता संग्राम में भी इसने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उच्च न्यायालय की स्थापना के समय यहां जजों के पांच पद थे जबकि जजों के 160 पद हैं। हाईकोर्ट इलाहाबाद देश की जनसंख्या के छठवें हिस्से की सेवा कर रहा है।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा, इलाहाबाद एक पवित्र स्थान है। यहां दुनिया का सबसे बड़ा मेला लगता है। संगम स्नान के लिए करोड़ों लोग आते हैं। इसका अपना इतिहास है। इस शहर ने महान स्वतंत्रता सेनानी, न्यायविद्, वैज्ञानिक, कवि और लेखक दिए हैं। न्याय के विकास में इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का 150 वर्षों का स्वर्णिम इतिहास रहा है। इसने कई ऐसे फैसले दिए हैं जिससे देश ने करवट बदली है।

यह हाईकोर्ट रूल ऑफ लॉ का जीता जागता उदाहरण है। कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने भी इलाहाबाद हाईकोर्ट और इसकी परंपराओं की तारीफ की। कहा, यह डेढ़ सौ वर्षों पुराना हाईकोर्ट है। इसने बहुत से जज और नेता देने के साथ ही कई मानक स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, इलाहाबाद  बहुत प्राचीन शहर है। यहां राजा हर्षवर्धन ने दान की परंपरा कायम की तो भारद्वाज मुनि के आश्रम में ज्ञान की सरस्वती बहती रही है। चंद्रशेखर आजाद ने भी आजादी के लिए इसी धरती पर अपने प्राणों की अहुति दी।
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