याची की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका में इस बात का जोर दिया गया है कि वजूखाना क्षेत्र का सर्वेक्षण आवश्यक है। इससे वादी और प्रतिवादियों को समान रूप से लाभ होगा और उचित निर्णय पर पहुंचने में मदद मिलेगी। यह भी कहा गया है कि जिला न्यायाधीश अपने 21 अक्तूबर के आदेश में वजूखाना क्षेत्र के सर्वेक्षण के लिए निर्देश देने के लिए कानून द्वारा निहित अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने में विफल रहे।
अपने आदेश में जिला जज की अदालत ने यह कहने में गलती की की 21 जुलाई 2023 के आदेश में याची ने जानबूझकर विधिवत संरक्षित क्षेत्र को सर्वेक्षण के दायरे से बाहर कर दिया था। क्योंकि, जिस आवेदन पर उक्त आदेश पारित किया गया था उसमें संरक्षित क्षेत्र के सर्वेक्षण की मांग करने वाली कोई प्रार्थना नहीं थी।
यह भी कहा गया कि अभी वाराणसी जिला न्यायाधीश के 21 जुलाई के आदेश के अनुसार वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण हो रहा है। ताकि, यह निर्धारित किया जा सके की मस्जिद का निर्माण हिंदू मंदिर के पहले से मौजूद संरचना पर किया गया था या नहीं। 2 नवंबर को वाराणसी जिला न्यायालय ने के एस आई को 17 नवंबर तक ज्ञानवापी मस्जिद सर्वेक्षण के बारे में अपनी रिपोर्ट अदालत में जमा करने का निर्देश दिया है।