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मैनपुरी में छात्रा के फांसी लगाने का मामला : हाईकोर्ट ने दिया निष्पक्ष जांच का आदेश, कहा- पुलिस को प्रशिक्षण देना जरूरी

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 16 Sep 2021 04:49 PM IST

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मैनपुरी में छात्रा के फांसी लगाने के मामले में डीजीपी मुकुल गोयल को निष्पक्ष जांच कराने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने पुलिस की ढीली विवेचना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देर से जांच करने और जांच सही दिशा में न करने के कारण अपराधी छूट जाते हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मैनपुरी की छात्रा की मौत मामले में डीजीपी मुकुल गोयल को निष्पक्ष जांच का आदेश देते हुए जांच की प्रगति से कोर्ट को अवगत कराने को भी कहा है। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति एमएन भंडारी एवं न्यायमूर्ति एके ओझा की खंडपीठ ने महेंद्र प्रताप सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को दिया।
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कोर्ट ने डीजीपी से सर्कुलर जारी कर सीआरपीसी की धारा 173 का पालन कर दो माह में विवेचना पूरी करने का सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश देने को कहा है। यह भी कहा कि पुलिस को प्रशिक्षण देने की भी जरूरत है। अधिकतर विवेचना कांस्टेबल करता है। दरोगा कभी-कभी जाते हैं। अपर पुलिस अधीक्षक व उप पुलिस अधीक्षक पर हुई कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।


कोर्ट ने कहा निष्पक्ष विवेचना न होने से सजा का रेट 6.5 फीसदी है, जबकि विदेश में यह 85 फीसदी है। सही विवेचना न होने से अपराधी छूट रहे हैं।कोर्ट ने टिप्पणी भी की। कहा कि पुलिस बरामदगी की बजाय शस्त्र प्लांट करती है। बैलेस्टिक रिपोर्ट मैच न करने से अपराधी बरी होते हैं। पैसा सब कुछ नहीं। स्वर्ग कहीं और नहीं, सब को कर्मों का फल यहीं भुगतना पड़ता है। जांच में देरी से भी साक्ष्य नहीं मिल पाते। अपराधी जानते हैं कुछ नहीं होगा।
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