याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अपराध छोटा है। याची का उससे कोई मतलब नहीं है। शिकायत करने वाले की बोलेरो सह अभियुक्त ने किराये पर ली थी। वह मासिक किराये के भुगतान का जिम्मेदार नहीं है। सियासी व्यक्ति होने की वजह से उसके खिलाफ 17 मामलों में आपराधिक इतिहास बताया गया है, लेकिन सभी मामले छोटे हैं। अपराधों का विचारणीय मजिस्ट्रेट द्वारा किया जाना है।
पक्षकारों ने आपसी समझौता भी किया था। याची जेल में है। जबकि सरकारी अधिवक्ता ऋषि चड्ढा ने इसका विरोध किया। तर्क दिया कि याची ने शिकायतकर्ता के पति को फोन पर धमकी दी। इसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग है। पक्षकारों को सुनने के बाद कोर्ट ने याची की जमानत अर्जी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।