याची की ओर से कहा गया उसके खिलाफ शिकायतकर्ता सीमा की ओर से झांसी जिले के सीपरी थाने में आईपीसी की धारा 498, 323, 506 और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज कराया गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रारंभिक जांच न होने के आधार पर एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि जांच करना या न करना जांच अधिकारी का अधिकार क्षेत्र है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार ओझा ने आशीष कुमार की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
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याची की ओर से कहा गया उसके खिलाफ शिकायतकर्ता सीमा की ओर से झांसी जिले के सीपरी थाने में आईपीसी की धारा 498, 323, 506 और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज कराया गया है। आरोप है कि याची ने शिकायतकर्ता से दहेज की मांग की और मारापीटा। मामला सीजेएम कोर्ट में विचाराधीन है। मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी गई और संज्ञान व समन आदेश भी पारित कर दिया गया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत कार्यवाही में साक्ष्य के मूल्यांकन की अनुमति नहीं है। कोर्ट का कहना था कि मामले में पीड़िता को याची द्वारा पीटा गया और परेशान किया गया। दहेज की मांग की गई या नहीं, यह तथ्य का सवाल है? जिसे इस कार्यवाही में तय नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस आधार पर याचिका को खारिज कर दिया।