बचाव पक्ष के वकील ने कहा- सामाजिक प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने का प्रयास
पीड़िता का आरोप है कि उसका ससुर सह आरोपी के साथ उसके भाई के घर आया और उससे पूछा कि क्या उसका भाई घर में है। जब पीड़िता ने उनको बताया कि उसका भाई घर पर नहीं है तो आरोपी ससुर ने गाली-गलौज करना शुरू कर दिया। विरोध करने पर दोनों आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की। याची खान के वकील ने तर्क दिया कि इस मामले में अन्य सह आरोपी मोहम्मद हारून को हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत दी जा चुकी है। इसलिए वह भी समानता के आधार पर अग्रिम जमानत पाने का हकदार है।
पृष्ठभूमि को देखते हुए अदालत ने आरोपी खान को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए कहा कि यह काफी अस्वाभाविक है कि एक ससुर खुद किसी अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर अपनी बहू के साथ दुष्कर्म करेगा। ऐसा लग रहा है कि समाज में उसकी प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने या अपमानित करने के उद्देश्य से यह झूठा आरोप लगाया गया है।