याचिका पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बहस की। इनका कहना था कि साइंटिफिक सर्वे होने से ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग सहित अन्य धार्मिक निर्माण की सही जानकारी मिल सकेगी। यह भी पता चल सकेगा कि वहां मिले शिवलिंग व अन्य मूर्तियां व धार्मिक वस्तुएं कितनी पुरानी है।
याचीगण ने जिला अदालत वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का साइंटिफिक सर्वे कराने की मांग में अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट ने यह कहते हुए अर्जी 14 अक्तूबर को खारिज कर दी कि ऐसा करने से शिवलिंग के आकार को क्षति पहुंच सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने परिसर की यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया है। याचिका में जिला न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।
भारत सरकार की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता मनोज सिंह ने मामले में तीन महीने का समय मांगा है। किंतु कोर्ट ने 30 नवंबर तक स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य सरकार के मुख्य स्थाई अधिवक्ता पंचम बिपिन बिहारी पांडेय को भी प्रमुख सचिव का हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि उन्हें अभी तक याचिका की कॉपी नहीं मिली है। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह देने का इंतजार न करें। कॉपी लेकर जवाब दाखिल करें। कोर्ट ने कहा कि वह इस संबंध में संबंधित सचिव को भी सूचित करें। ताकि, अगली सुनवाई पर जवाब भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत हो सके।
कोर्ट ने पूछा छेड़छाड़ करे बिना हो सकती है कार्बन डेटिंग
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या कोई मॉडल है जिससे आकार में बिना किसी छेड़छाड़ के डेटिंग की जा सकती है? इस पर एएसआई की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि आजकल कई ऐसे मॉडल आ गए हैं जो आकार को बिना किसी नुकसान पहुंचाए ही कार्बन डेटिंग कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने अपने अधीन काम कर रही एजेंसियों से संपर्क किया है और इस पर विस्तृत चर्चा करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इसके लिए तीन महीने का समय दिया जाए। कोर्ट ने इससे इंकार कर दिया। कहां 30 नवंबर तक इस पर जवाब दें।