ट्रायल के दौरान दाखिल धारा -319 की अर्जी पर कोर्ट ने एफआईआर के कथन व गवाहों के बयान के आधार पर याची नामजद अभियुक्तों को साथ में ट्रायल के लिए सम्मन किया। चश्मदीद बयान में कहा गया है कि बिजली की रोशनी में फायर करते नामजद अभियुक्तों को देखा है। जिसकी वैधता को चुनौती दी गई थी।
याची अधिवक्ता ने कई नजीरें पेश की और कहा कि बिना साक्ष्य के कोर्ट मैकेनिकल तरीके से किसी को सम्मन जारी नहीं कर सकती। याचीगण मृतक के नजदीकी संबंधी हैं। अभियोजन की ओर से अन्य चश्मदीद गवाहों का ट्रायल में परीक्षण नहीं कराया गया। एक मात्र चश्मदीद के बयान को साक्ष्यों का समर्थन नहीं है। इसलिए वह विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है जिसके आधार पर सम्मन जारी किया जा सके।