इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नारी निकेतन की एक नाबालिग लड़की की अभिरक्षा उसके पति को सौंपने की इजाजत देते हुए कहा कि समझदार और अपने भविष्य का बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लेने में सक्षम नाबालिग को अपने पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार है। वह अपनी मर्जी से जीवन जीने की हकदार है।
यह फैसला न्यायमूर्ति बीके बिरला और न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने अलीगढ़ के नारी निकेतन की नाबालिग सनिवासिनी और उसके पति की ओर से संयुक्त रूप से दाखिल याचिका को स्वीकार करने हुए सुनाया।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी नाबालिग लड़की जो अपने हित और जीवन के लिए समझदारी भरा निर्णय लेने में सक्षम है, उसे अपने पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार है। अपने भविष्य के लिए बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लेने की क्षमता रखने वाली नाबालिग की अभिरक्षा का निर्णय लेते समय उसके हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
मामला अलीगढ़ का है। नाबालिग लड़की की मां ने उसके पति मनीष प्रताप के खिलाफ अलीगढ़ के गांधी पार्क थाने में नाबालिग के अपहरण का मामला दर्ज कराया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने पुलिस ने लड़की को बरामद कर नारी निकेतन भेज दिया था, जबकि पति को जेल भेज दिया गया।