मेडिकल रिपोर्ट में 19 वर्ष पाई गई उम्र
कोर्ट ने कहा कि दूसरी जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही पीठ इस मामले पर यह गौर नहीं कर सकती कि पहले जमानत आवेदन पर निर्णय लेते समय तत्समय प्रस्तुत तथ्य दर्ज किए गए हैं या नहीं। दूसरी बात यह कि यदि यह न्यायालय इसकी जांच करता है, तो पहले के आदेश की समीक्षा करना होगा, जो कि आपराधिक कानून के तहत स्वीकार्य नहीं है।
इसके पूर्व याची के अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि याची को इस प्रकरण में झूठा फंसाया गया है। उसने कथित अपराध कारित नहीं किया है। प्रथम सूचना रिपोर्ट काफी विलंब से दर्ज कराई गई है, जिसका कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, जबकि वादिनी के घर से थाने की दूरी मात्र दो किमी है।
मेडिकल रिपोर्ट में पीड़ित की उम्र 19 वर्ष पाई गई है। हालांकि, अपर शासकीय अधिवक्ता ने इसका विरोध किया। कहा, प्रथम जमानत अर्जी के आदेश में भले ही याची के अधिवक्ता की ओर से प्रस्तुत किए गए तर्कों को उद्धृत न किया गया हो, किंतु यह माना जाएगा कि उन्होंने उन सभी तर्कों को सुनने के बाद ही जमानत निरस्त की है। ऐसी स्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।