यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की आपराधिक अपील की सुनवाई करते हुए दिया है। नाबालिग के अपहरण व दुष्कर्म के आरोपी थाना जखराना, फिरोजाबाद के सोनू को पीड़िता के उसके पक्ष में बयान देने व दोनों के साथ जीवन बिताने के तथ्य को देखते हुए बरी कर दिया था।
सरकार ने सात मई 22 के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करने में 213 दिन की देरी होने का कारण बताया कि डीजीसी व जिलाधिकारी के मार्फत सरकार को 4 अगस्त 22 को पत्रावली मिली। हाईकोर्ट से गठित कमेटी ने विचार किया। अपनी रिपोर्ट में कहा कि फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करने लायक तथ्य नहीं है। 13 जनवरी 23 के शासनादेश से सरकार ने कमेटी की रिपोर्ट की अनदेखी कर अपील दाखिल करने का निर्णय लिया।
शिकायतकर्ता ने कक्षा 10 की छात्रा अपनी नाबालिग 15 साल की बहन के अपहरण व दुष्कर्म करने के आरोप में 27 जनवरी 14 को एफ आई आर दर्ज कराई। पुलिस चार्जशीट पर कोर्ट ने संज्ञान लिया और अभियुक्त पर आरोप निर्मित किए। पीडि़ता ने कोर्ट में बयान दिया कि आरोपी ने उसके साथ कुछ भी ग़लत करने की कोशिश नहीं की। सत्र अदालत विशेष अदालत ने अभियुक्त को बरी कर दिया। आरोपी का कहना था कि पीडि़ता की आयु 18 साल की है और दोनों साथ रह रहे हैं। इस पर कोर्ट ने विधि सचिव से पूछा है कि कमेटी की रिपोर्ट किस आधार पर नहीं मानी गई और अपील करने का फैसला लिया।