प्रमुख दलों से टिकट के लिए दावेदारी के साथ उन्होंने मतदाताओं के बीच पहुंच बनानी भी शुरू कर दी थी। भाजपा से कविता यादव त्रिपाठी, अवधेश गुप्ता समेत कई नामों पर तेजी से चर्चा होने लगी थी। वहीं सपा के राम मिलन यादव, अनूप यादव, हरिओम साहू के नाम के बैनर, पोस्टर से पूरा शहर पट गया था। ज्यादातर टिकट पक्का भी मान रहे थे। कांग्रेस में तो दूसरे दल के पटेल बिरादरी के एक नेता को उम्मीदवार बनाए जाने की भी कवायद शुरू हो गई थी।
इनके अलावा गंगापार के अध्यक्ष सुरेश यादव समेत पिछड़ी जाति के अन्य नेताओं ने भी पार्टी से टिकट के लिए दौड़भाग शुरू कर दी थी। ये सभी लोग अब भी दावेदार हैं लेकिन बदले परिदृश्य में टिकट की राह सभी के लिए कठिन हो गई है। अब पूर्व महापौर चुने जा चुके तथा प्रमुख दलों से चुनाव लड़ चुके कई नेता फिर से सामने आ गए हैं। इनके अलावा अगड़ी जाति के साथ अनुसूचित जाति के भी कई नेनाओं ने दावेदारी शुरू कर दी है।
65 फीसदी से अधिक हैं सवर्ण मतदाता
प्रयागराज नगर निगम क्षेत्र में सवर्ण मतदाताओं की संख्या 65 फीसदी से अधिक बताई जा रही है। पूर्व में हुए रेंडम सर्वे के अनुसार यहां ओबीसी की आबादी 19.40 फीसदी है। वहीं 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जाति की आबादी इससे भी कम यानी, 15.34 फीसदी है। ऐसे में नगर निगम के चुनाव में हमेशा ही अगड़ी जाति के मतदाता प्रभावी रहे हैं।
नगर निगम के इतिहास को देखें तो करीब 19 वर्ष बाद 1989 में नगर निकायों के लिए चुनाव हुआ था। उस समय प्रयागराज (इलाहाबाद) महानगर पालिका थी और पार्षदों ने नगर प्रमुख का चुनाव किया था। 1989 के चुनाव में श्यामा चरण गुप्ता नगर प्रमुख चुने गए थे। हालांकि, उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से एक वर्ष पहले इस्तीफा दे दिया था और उपचुनाव में रविभूषण बधावन नगर प्रमुख निर्वाचित हुए।नगर निगम के गठन के बाद 1995 में चुनाव हुआ।
यह पहला मौका था जब जनता के द्वारा महापौर का चुनाव हुआ। उस समय यह सीट महिलाओं के आरक्षित थी और डॉ. रीता बहुगुणा जोशी महापौर चुनी गईं। इसके बाद 2000 में डॉ. केपी श्रीवास्तव तथा 2006 में चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह महापौर निर्वाचित हुए।इसके बाद फिर यह सीट महिला के लिए आरक्षित हो गई और अभिलाषा गुप्ता नंदी महापौर चुनी गईं। 2017 में यह सीट फिर अनारक्षित हो गई और अभिलाषा गुप्ता दोबारा मेयर चुनी गईं। इस तरह से इस सीट पर अब तक हुए पांच चुनाव में चार महापौर चुने गए और सभी सामान्य वर्ग से रहे।
नगर पंचायत की सिर्फ दो सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित
जिले की आठ नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद के आरक्षण की घोषणा भी बृहस्पतिवार को कर दी गई। इनमें से दो सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। जबकि, दिसंबर में जारी आरक्षण की सूची के अनुसार छह सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थीं।
नगर पंचायत दिसंबर में जारी सूची के अनुसार आरक्षण अब आरक्षण की स्थिति
शंकरगढ़ ओबीसी- महिला अनुसूचित जाति महिला
लालगोपालगंज- महिला महिला
हंडिया- महिला पिछड़ा वर्ग
कोरांव- महिला अनारक्षित
सिरसा- महिला अनारक्षित
भारतगंज- महिला पिछड़ा वर्ग महिला
मऊआइमा- अनारक्षित पिछड़ा वर्ग
फूलपुर- अनारक्षित अनारक्षित