मामले में खलीलाबाद पुलिस ने ट्रक से एबॉट मेडिकल लिमिटेड निर्मित फेंसेडिल कफसीरप पकड़ा था। आरोप है कि यह पकड़ा गया कफ सीरप याची का है। सो उसके खिलाफ संत कबीरनगर के खलीलाबाद थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नशीले कफ सीरप केकारोबारी पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई किए जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही मामले में जुड़े प्रतिवादियों से जवाब भी मांगा है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने केलिए चार सप्ताह का समय दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार और न्यायमूर्ति सैयद विज मियां ने अमित गोयल तथा अन्य की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया।
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मामले में खलीलाबाद पुलिस ने ट्रक से एबॉट मेडिकल लिमिटेड निर्मित फेंसेडिल कफसीरप पकड़ा था। आरोप है कि यह पकड़ा गया कफ सीरप याची का है। सो उसके खिलाफ संत कबीरनगर के खलीलाबाद थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
याची ने याचिका दाखिल कर अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए प्राथमिकी रद्द किए जाने की मांग की। उसकी ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि पुलिस की ओर से बरामद किया गया कफ सीरप नशीले पदार्थ की श्रेणी में नहीं आता है। कोर्ट ने एक अन्य याचिका में सुनवाई के दौरान यह माना कि मौजूदा मामले में बरामद किया गया कफ सीरप नशीले पदार्थ की श्रेणी में नहीं आता है। इसलिए एनडीपीएस के तहत यह मामला बनता ही नहीं।
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कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याची की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए मामले में चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने याची को जांच में सहयोग करने का भी निर्देश दिया है।