कुलसचिव ने अपने पहले के आदेश को वापस ले लिया। याचिका में चुनौती दी गई। याची को अंतरिम राहत मिली। कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए पद खाली होने तक विचार करने व याची को आठ फीसदी ब्याज सहित बकाये का भुगतान का निर्देश दिया। जिस पर गठित कमेटी की रिपोर्ट पर सेवा समाप्त कर दिया गया। जिसे चुनौती दी गई है।
विश्वविद्यालय के अधिवक्ता का कहना था कि याची की सेवा नियमितीकरण एक याचिका कोर्ट ने केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने पर सेवा नियमित करने का कोई नियम न होने के कारण याचिका खारिज कर दी थी। इसलिए याची को सेवा में बने रहने का अधिकार नहीं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विपक्षियों से जवाब मांगा है।