इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर विकास प्राधिकरण को 1991 के मास्टर प्लान में घोषित सार्वजनिक भूमि की प्रकृति बदल निर्माण की अनुमति देने से रोक दिया है। वहीं याचिका पर 22 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति पीके एस बघेल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खण्डपीठ ने जफर आबिद और अन्य की जनहित याचिका पर दिया है।
याचिका में मास्टर प्लान और पर्यावरण का मूद्दा उठाया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि के डीए को लोक संपत्तियों की प्रकृति बदलने की अनुमति दी गई तो कानपुर शहर के पर्यावरण में बुरी तरह से बदलाव आएगा। डीए पर 1991 के मास्टर प्लान में बदलाव कर सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर निर्माण की अनुमति देने का याचिका में आरोप लगाया गया है।