करेली थाने में दर्ज रंगदारी के एक मामले में जेल में बंद अली अहमद को सोमवार को जिला न्यायालय में 150 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के बीच लाया गया। न्यायालय परिसर में प्रवेश से लेकर बाहर निकलने तक पुलिस का कड़ा पहरा रहा। करीब दो घंटे तक न्यायालय में रहने के बाद अली को तीन गाड़ियों के काफिले में झांसी जेल के लिए रवाना किया गया।
झांसी में सड़क हादसे में अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान की मौत के बाद आठ अगस्त को जेल में बंद उमर और अली अपने भाई के सुपुर्द-ए-खाक में शामिल होने प्रयागराज आए थे। उस दौरान लखनऊ और झांसी से प्रयागराज आने वाले दोनों भाइयों के समर्थकों की बड़ी संख्या में गाड़ियां साथ चली थीं। कई जगह यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई थी। कुछ टोल प्लाजा पर टोल भुगतान न करने के मामले भी सामने आए थे।
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नवाबगंज समेत कई स्थानों पर पुलिस ने समर्थकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए थे। बाद में कई वाहन सीज किए गए थे। पिछले घटनाक्रम को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए।
अली की सुरक्षा में 30 से ज्यादा पुलिसकर्मी रहे तैनात
पुलिस की कोशिश थी कि न्यायालय परिसर के आसपास अनावश्यक भीड़ और वाहनों का जमावड़ा न होने पाए। इसके बावजूद अली के प्रयागराज पहुंचने के दौरान समर्थकों की कुछ गाड़ियां उसके पीछे चलती रहीं। अली को तीन गाड़ियों के काफिले में न्यायालय लाया गया। उसके साथ करीब 30 से ज्यादा पुलिसकर्मी सुरक्षा में तैनात रहे। पेशी के दौरान भी न्यायालय परिसर में सुरक्षा घेरा रखा गया।
कौशाम्बी में रोका गया अहजम
कौशाम्बी पुलिस ने सैनी में पुलिस काफिले के पीछे चल रही गाड़ियों को रोक लिया। गहन चेकिंग के बाद ही छोड़ा। पुलिस की गाड़ी के पीछे अली के छोटे भाई अहजम की भी गाड़ी थी। पुलिस ने अहजम को कौशाम्बी में ही रोक लिया। कौशाम्बी पुलिस का कहना है कि यह कोई पूर्व नियोजित कार्रवाई नहीं थी। रूटीन चेकिंग थी।