दहेज का आरोप मनगढ़ंत, कोर्ट ने रद्द किया केस
आवेदक के वकील ने दलील दी कि संपूर्ण एफआईआर के साथ-साथ विपक्षी के बयानों में दहेज आदि की मांग के संबंध में केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोप हैं। किसने और कब दहेज की मांग की। इसका जिक्र एफआईआर या गवाहों के बयान में नहीं किया गया है। रिकॉर्ड पर उपलब्ध संपूर्ण सामग्री से भी आवेदकों के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। ऐसे में मामले की संपूर्ण कार्यवाही रद्द की जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयानों में आवेदकों के खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं लगाया गया है। दहेज की मांग, यातना के संबंध में केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर की बारीकी से जांच व गवाहों के बयान से यह स्पष्ट है कि पति-पत्नी के बीच आपसी विवाद के कारण दहेज की मांग, प्रताड़ना, उत्पीड़न के संबंध में झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया है। कोर्ट ने मुकदमे की संपूर्ण कार्यवाही रद्द कर दी।